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Thursday, April 2, 2026
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Happy Birthday Ramnath Kovind: IAS, वकील और फिर भारत के राष्ट्रपति, ऐसा रहा है रामनाथ कोविंद के जीवन का संघर्ष

रामनाथ कोविंद आज अपना 79वां जन्मदिन मना रहे हैं। रामनाथ कोविंद का सफर बेहद रोचक और प्रेरणादायक रहा है। उत्तर प्रदेश से पहला राष्ट्रपति बनने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है।

नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज अपना 79वां जन्मदिन मना रहे हैं। 1 अक्टूबर 1945 को उत्तर प्रदेश के कानपुर के देहात में रामनाथ कोविंद का जन्म हुआ था। रामनाथ कोविंद सफर बेहद रोचक और प्रेरणादायक रहा है। उत्तर प्रदेश से पहला राष्ट्रपति बनने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। रामनाथ कोविंद वकील से लेकर राज्यपाल तक रहे हैंं। आज उनके जन्मदिन पर उनके बारे में कुछ रोचक बातें आपको बताते हैं। 

बचपन से पढ़ने-लिखने का था शौक

आपको बता दें कि सिविल सर्विस में चुने जाने से लेकर सुप्रीम कोर्ट में वकील रहे रामनाथ को बचपन से पढ़ाई लिखाई का शौक था। कोविंद के घर की हालत ठीक नहीं थी और जब वो छोटे थे तब उनकी मां भी गुजर गई थी। रामनाथ के एक दोस्त ने बताया कि उनके क्षेत्र में बारिश के कारण इलाके में कमर तक पानी भर जाता था, लेकिन रामनाथ सारी परेशानियों का सामना करते हुए स्कूल जाते थे। 

बचपन के किस्से

ईमानदार और सरल व्यवहार के रामनाथ

रामनाथ का स्कूल घर से करीब 4 किलोमीटर दूर था। एक बार जब रामनाथ अपने दोस्त के साथ स्कूल जा रहे थे तो रास्ते में उनके एक दोस्त ने एक खेत से गन्ना तोड़ लिया और जब खेत के मालिक ने देखा तो लड़के को पकड़ लिया। यह देखकर रामनाथ कोविंद ने अपने दोस्त की तरफ से माफी मांगी, साथ ही गन्ने के बदले पैसे देने का आग्रह किया। जिसकी वजह से खेत के मालिक ने उनके दोस्त को छोड़ दिया। यह सब देखकर पता चलता है कि रामनाथ कोविंद बचपन से ही बहुत सरल और ईमानदार थे।  

पिता की परचून की दुकान चलाया करते थे 

बचपन में रामनाथ कोविंद स्कूल के बाद अपने पिता की परचून की दुकान भी चलाते थे। उनके पिता गांव के लोगों को आयुर्वोदिक दवाइयां भी देते थे। उस समय उनके पास कोई खेती नहीं थी।

UPSC की परीक्षा पास कर चुके थे

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद UPSC की परीक्षा पास कर संबद्ध सेवाओं में चयनित हो गए थे, लेकिन फिर भी कोविंद ने यह नौकरी छोड़ 1977-1993 तक दिल्ली के हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में 16 साल प्रैक्टिस की। उन्होंने 1980-1993 तक सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के परमानेंट काउंसलर भी रहे हैं। 

स्कूटर पर किया चुनाव प्रचार 

इसके बाद 1990 में BJP के टिकट पर कोविंद पहली बार घाटमपुर से लोकसभा चुनाव लड़े थे। आप सुनकर अचंभीत हो जाएंगे की चुनाव प्रचार के दौरान उनके पास गाड़ी का इंतजाम नहीं होने पर उन्होंने खुद ही गांव-गांव धूमकर चुनाव का प्रचार किया था। हालांकि वो चुनाव में हार गए थे। 

आपको बता दें कि रामनाथ कोविंद काफी समय तक मोरारजी देसाई के साथ जुड़े हुए थे और जब मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने रामनाथ कोविंद को अपना एक्जीक्यूटिव एसिस्टेंटे बना लिया था।   

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