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Wednesday, March 4, 2026
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‘मैं जब भी इश्क लिखना चाहूं तो हमेशा इंकलाब लिखा जाता है’, आज शहीद भगत सिंह की जयंती पर उनके कुछ अनसूने किस्से

शहीद भगत सिंह की आज जयंती है। उन्होंने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया और ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें फांसी दी। उनकी बहादुरी से हर एक युवा प्रेरित होता है। उनकी फांसी ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।

नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। 28 सितंबर 1907 को लायलपुर (फैसलाबाद, पाकिस्तान) के गांव बावली में जन्मे शहीद भगत सिंह की आज जयंती है। उन्होंने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया और 23 मार्च 1931 को ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें, राजगुरु और सुखदेव के साथ फांसी दे दी थी।

आज भी भगत सिंह हमारे दिलों में जिंदा हैं। उनका जन्मस्थान पाकिस्तान में मौजूद है। आज उनकी जयंती पर हम उनको श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। भगत सिंह की बहादुरी, निष्ठा और बलिदान ने भारत के हर एक नागरिक और युवाओं को प्रेरित किया है। 

महाराजा रणजीत सिंह की सेना में था परिवार

भगत सिंह के परिवार के लोग महाराजा रणजीत सिंह की सेना में थे। उनके पिता और चाचा गदर पार्टी के सदस्य थे, जो ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ाई कर रही थी। इस वजह से बचपन से ही भगत सिंह में अंग्रेजों के खिलाफ गुस्सा भरा हुआ था। उन्होंने देश की आजादी के लिए क्रांति का रास्ता अपनाया और हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य बने। इसमें चंद्रशेखर आजाद, राम प्रसाद बिस्मिल और सुखदेव जैसे महान क्रांतिकारी थे।

फांसी ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया 

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की फांसी ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। उन्होंने फांसी के फंदे को हंसते-हंसते चूमा और इंक़लाब ज़िन्दाबाद का नारा लगाया। उनकी फांसी से पूरा भारत गुस्से से भर गया था और वहीं पूरा भारत भावुक भी था।  

पाकिस्तान में है पुश्तैनी घर 

भगत सिंह का पुश्तैनी घर अब पाकिस्तान में है। उनका जन्म बंगा गांव में हुआ था, जिसे चार साल पहले हेरिटेज साइट घोषित किया गया। अब इसे सुरक्षित करके दो साल पहले आम लोगों के लिए खोल दिया गया।

पाकिस्तान के फैसलाबाद के अधिकारी ने इस मकान की मरम्मत के लिए 5 करोड़ रुपए का बजट भी दिया था। वहां के रिसर्च स्कॉलर तौहिद चट्ठा के अनुसार भगत सिंह के गांव को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।

बंटवारे के बाद उनके मकान पर एक वकील ने कब्जा कर लिया था, लेकिन उनके परिवार से जुड़ी कुछ चीजें सुरक्षित रखी गईं हैं। इनमें भगत सिंह की मां के कुछ सामान, दो लकड़ी के ट्रंक और एक लोहे की अलमारी शामिल हैं। अब प्रशासन ने मकान और सामान दोनों को अपने कब्जे में ले लिया है।

हर साल 23 मार्च को भगत सिंह के शहादत दिवस पर उनके गांव में मेला आयोजित किया जाता है।  

आजादी में महत्वपूर्ण योगदान 

भगत सिंह ने आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लोग उनको आजतक याद करते हैं और हमेशा करते रहेंगे। भगत सिंह ऐसे क्रांतिकारी थे, जिन्होंने अपनी जवानी में ही देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। भगत सिंह के नारे हम सबके लिए ही बहुत प्रेरक हैं। तो आइए हम उनके कुछ नारों को बताते हैं। 

भगत सिंह के नारे

  • सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है। 

  • बम और पिस्तौल से क्रांति नहीं आती, बल्कि क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है। 

  • मैं एक इंसान हूं और जो भी चीजे इंसानियत पर प्रभाव डालती है मुझे उनसे फर्क पड़ता है।

  • वे मुझे मार सकते हैं, लेकिन वे मेरे विचारों को नहीं मार सकते। वे मेरे शरीर को कुचल सकते हैं, लेकिन वे मेरी आत्मा को नहीं कुचल पाएंगे।

  • क्रांति मानव जाति का एक अविभाज्य अधिकार है। स्वतंत्रता सभी का एक अमर जन्मसिद्ध अधिकार है

  • मैं इतना पागल हूँ कि मैं जेल में भी आज़ाद हूँ

  • अगर बहरों को सुनाना है, तो आवाज़ बहुत तेज़ होनी चाहिए

  • बम और पिस्तौल क्रांति नहीं लाते। क्रांति की तलवार विचारों की तीली पर तेज़ होती है।

  • सूर्य अपनी यात्रा में हमारे इस देश से ज़्यादा स्वतंत्र, खुशहाल और सुंदर किसी और देश में न आए।

  • क्रांति मानव जाति का एक अविभाज्य अधिकार है। स्वतंत्रता सभी का एक अविनाशी जन्मसिद्ध अधिकार है। श्रम ही समाज का असली पालनहार है। 

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