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Wednesday, April 8, 2026
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बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए 300 किलोमीटर लंबा पुल तैयार, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वीडियो किया शेयर

भारत की पहली बुलेट ट्रेन अब हकीकत बनने के और करीब पहुंच गई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को सोशल प्लेटफार्म X पर एक वीडियो शेयर किया।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन परियोजना) की महत्वाकांक्षी केंद्र सरकार की परियोजना 300 किलोमीटर के वायडक्ट कार्य के पूरा होने के साथ अब हकीकत बनने के और करीब आ गई है। यह जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को दी। उन्होंने इस बारे में सोशल मीडिया एक्स पर एक वीडियो भी पोस्ट किया है। बता दें कि वायडक्ट परिवहन के लिए नदी पर बनाया गया एक पुल होता है।

यह राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) द्वारा कार्यान्वित की जा रही भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना में एक प्रमुख मील का पत्थर है। नवंबर 2023 में, एनएचएसआरसीएल ने कॉरिडोर पर 100 किलोमीटर लंबे पुल और 250 किलोमीटर लंबे घाट का निर्माण पूरा कर लिया है।

इन नदियों पर निर्मित पुल


NHSRCL के अनुसार, गुजरात की छह प्रमुख नदियों पर पुल निर्माण कार्य में पार, पूर्णा, मिंडोला, अंबिका, औरंगा और वेंगानिया नदियों पर निर्माण शामिल है। ये नदियां वलसाड और नवसारी जिलों में हैं। इस पुल का निर्माण 40 मीटर लंबे पूर्ण-स्पैन बॉक्स गर्डर्स और सेगमेंटल गर्डर्स का उपयोग करके किया गया है, तथा निर्मित खंडों पर ध्वनि अवरोधक पहले से ही लगाए जा रहे हैं। अन्य निर्माण कार्य भी चल रहा है। इस परियोजना के तहत वलसाड में 350 मीटर लंबी सुरंग का सफलतापूर्वक निर्माण किया गया है तथा सूरत में 28 प्रस्तावित स्टील पुलों में से पहला 70 मीटर लंबा पुल बनाया गया है।

हाई-स्पीड रेल निर्माण में आत्मनिर्भर बना भारत


भारत में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत ज़्यादातर उन्नत उपकरण जैसे लॉन्चिंग गैंट्री, ब्रिज गैंट्री और गर्डर ट्रांसपोर्टर देश में ही तैयार किए जा रहे हैं। यह दर्शाता है कि भारत अब हाई-स्पीड रेल तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से अग्रसर है। इस परियोजना में उपयोग हो रही फुल-स्पैन लॉन्चिंग तकनीक के कारण निर्माण की गति पारंपरिक तरीकों की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक हो गई है। प्रत्येक स्पैन गर्डर का वजन लगभग 970 टन होता है, जिसे सटीकता के साथ स्थापित किया जा रहा है

शोर को कम करने के लिए वायाडक्ट के दोनों ओर तीन लाख से अधिक नॉइज बैरियर लगाए गए हैं, ताकि यात्रियों और आस-पास के क्षेत्रों में रहने वालों को न्यूनतम ध्वनि प्रदूषण हो। इसके साथ ही, महाराष्ट्र और गुजरात में विशेष रूप से बुलेट ट्रेन के संचालन और रखरखाव के लिए आधुनिक डिपो भी विकसित किए जा रहे हैं, जो इस पूरे प्रोजेक्ट को और अधिक सक्षम और टिकाऊ बनाएंगे।

गौरतलब है कि मुंबई और अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की आधारशिला 14 सितंबर, 2017 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन जापानी प्रधान मंत्री शिंजो आबे ने रखी थी। फरवरी 2016 में स्थापित NHSRCL, केंद्र सरकार और गुजरात और महाराष्ट्र की राज्य सरकारों की इक्विटी भागीदारी के साथ रेल मंत्रालय के तहत एक विशेष प्रयोजन वाहन के रूप में कार्य करता है। इस बुलेट ट्रेन परियोजना से दोनों राज्यों के बीच यात्रा का समय कम हो जाएगा।

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