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Wednesday, April 8, 2026
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Voter Turnout के लिए अमेरिकी फंडिंग के ट्रंप के आरोप के बाद, बीजेपी-कांग्रेस में ठन गई है

बता दें कि 16 फरवरी को एलन मस्क ने कई देशों को दी जा रही 486 मिलियन डॉलर यानी लगभग 4300 करोड़ रुपये की फंडिंग पर रोक लगा दी। यह फंडिंग लोकतंत्र मजबूत करने के नाम पर दी जाती थी।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के वोटर टर्नाउट के लिए मिलने वाली 182 करोड़ रुपये की फंडिंग पर सवाल उठाए हैं। ट्रंप ने पूछा था कि इस फंडिंग की मदद से क्या बाइडेन किसी और को जिताना चाहते थे। ट्रंप ने आरोप लगाया है कि बाइडेन सरकार भारतीय चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रही थी। अब इस आरोप पर बीजेपी और कांग्रेस में ठन गई है।

एलन मस्क के फैसले के बाद से लगातार चर्चा में है मुद्दा

बता दें कि 16 फरवरी को एलन मस्क ने कई देशों को दी जा रही 486 मिलियन डॉलर यानी लगभग 4300 करोड़ रुपये की फंडिंग पर रोक लगा दी। यह फंडिंग लोकतंत्र मजबूत करने के नाम पर दी जाती थी। इस रक़म में से 21 मिलियन डॉलर यानी करीब करीब 182 करोड़ रुपये भारत में भी भेजे गए। ट्रंप ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा कि वोटर टर्नआउट बढ़ाने के लिए भारत को अमेरिकी मदद की क्या जरूरत? 

जॉर्ज सोरोस से भी कनेक्शन

डोनाल्ड ट्रंप का बयान सामने आने बाद भारत में सियासत गरमा गई है। क्योंकि USAID से मिली मदद का इस्तेमाल जिस संस्था के जरिए हुआ उससे जॉर्ज सोरोस का भी कनेक्शन है। जॉर्ज सोरोस कई बार भारत में नरेंद्र मोदी की सरकार को हटाने के लिए मुहिम चलाने का ऐलान कर चुके हैं।

रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर साधा निशाना

भाजपा पार्टी के नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ट्रंप के खुलासे से साफ हो गया है कि अब तक अमेरिका से जो फंडिग हो रही थी, उसका इस्तेमाल भारत में चुनाव को प्रभावित करने, नरेंद्र मोदी की सरकार को गिराने की साजिश में किया जा रहा था।

अमेरिकी मदद का कांग्रेस से कोई संबंध नहीं

BJP के आरोपों के जवाब में कांग्रेस ने कहा कि USAID तो भारत में कई योजनाओं में मदद देती है, अगर कोई शक है तो सरकार USAID की भारत में फंडिंग पर व्हाइट पेपर ले आए। कांग्रेस के नेता तारिक अनवर ने कहा कि ट्रंप की बातों को सीरियसली नहीं लिया जा सकता क्योंकि अमेरिकी मदद का कांग्रेस से कोई संबंध नहीं है।

कांग्रेस के जयराम ने की श्‍वेत पत्र की मांग  

ट्रंप के बयान के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा कि यूएसएआईडी इन दिनों काफी चर्चा में है। इसकी स्थापना 3 नवंबर 1961 को हुई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा किए जा रहे दावे कम से कम कहने के लिए तो बेतुके हैं। फिर भी भारत सरकार को जल्द से जल्द एक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए जिसमें दशकों से भारत में सरकारी और गैर-सरकारी दोनों संस्थानों को यूएसएआईडी द्वारा दिए गए समर्थन का विवरण हो

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