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Tuesday, March 17, 2026
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बॉम्बे HC की यमन के नागरिक को फटकार, कहा- भारत की उदारता का गलत फायदा न उठाएं, आप पाकिस्तान….

Bombay HC: याचिकाकर्ता की इस दलील पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि आपको भारत की उदारता का अधिक फायदा नहीं उठाना चाहिए।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक शरणार्थी को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। यह शरणार्थी यमन का नागरिक है, जो पिछले 10 सालों से भारत में रह रहा था। इस शरणार्थी का नाम खालिद गोमेई मोहम्मद हसन है। खालिद गोमेई मोहम्मद हसन तय अवधि से अधिक समय से भारत में शरणार्थी के रूप में रह रहा था। उसको कुछ समय पहले ही भारत छोड़ने का नोटिस भी दिया गया था। जिसको लेकर याचिकाकर्ता शरणार्थी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में कहा कि वह पिछले 10 सालों सभारत में रह रहा है, इसलिए उसको भारत से बाहर नहीं भेजा जाना चाहिए। याचिकाकर्ता की इस दलील पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि आपको भारत की उदारता का अधिक फायदा नहीं उठाना चाहिए। बॉम्बे हाईकोर्ट ने शरणार्थी को सलाह दी कि अगर वह चाहे तो पडोसी देश पाकिस्तान या किसी खाड़ी देश जा सकता है। े

भारत की उदारता का फायदा न उठाएं

दरअसल यमन के नागरिक खालिद गोमेई मोहम्मद हसन को भारत छोड़ने का यह नोटिस महाराष्ट्र की पुणे पुलिस ने भेजा था, क्योंकि वह तय समय से ज्यादा अवधि से भारत में रह रहा था। लेकिन खालिद गोमेई मोहम्मद हसन भारत छोड़ने के लिए तैयार नहीं था, इसलिए उसने बॉम्बे हाईकोर्ट में यह याचिका दायर की थी। बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस रेवती मोहित डेरे और जस्टिस पृथ्वीराज चव्हाण की बेंच ने इस केस की सुनवाई की और इसको गंभीरता से लेते हुए, शरणार्थी को पाकिस्तान या किसी खाड़ी देश जाने की सलाह दे डाली। बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस रेवती मोहित डेरे और जस्टिस पृथ्वीराज चव्हाण की बेंच ने शरणार्थी से कहा की भारत की उदारता का फायदा न उठाएं।  

खालिद गोमेई मोहम्मद हसन के पास शरणार्थी कार्ड भी है

बताना चाहेंगे कि खालिद गोमेई मोहम्मद हसन के पास शरणार्थी कार्ड भी है। हसन ऑस्ट्रेलिया जाना चाहता है। वहीं भारत हसन को अब डिपोर्ट करने की तैयारी में है। इसी कारण उसने इससे बचने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में यह याचिका दायर की थी। वह कोर्ट में दलील दे रहा था कि हमारा देश यमन सबसे खराब मानवीय संकट से गुजर रहा है, इसी कारण से वह पिछले 10 सालों से भारत में रह रहा है। खालिद गोमेई मोहम्मद हसन ने अपनी याचिका में बताया था कि उमके देश यमन से इस मानवीय संकट के कारण 45 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। वहीं कोर्ट ने हसन को 15 दिन तक सुरक्षा देने का समय दिया है, कहा है कि अब आपको इससे ज्यादा समय नहीं दिया जाएगा।

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