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Monday, March 30, 2026
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सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच को केंद्र की हरी झंडी, AAP की बढ़ी मुश्किलें

दिल्ली में हेल्थ स्कैम की जांच एसीबी की टीम करेगी। दिल्ली की पूर्ववर्ती सरकार के स्वास्थ्य मंत्रियों सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख नेताओं सौरभ भारद्वाज और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। केंद्र सरकार ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के एक गंभीर मामले की जांच के लिए मंजूरी दे दी है। यह मामला दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग से जुड़े 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट्स में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। दिल्ली सरकार के सतर्कता विभाग ने इस संबंध में गृह मंत्रालय से जांच की अनुमति मांगी थी, जिसे अब स्वीकृति मिल गई है। वहीं, AAP ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है।

सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन पर भ्रष्टाचार की जांच तेज

इस साल की शुरुआत में हुए दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। पार्टी के दो प्रमुख चेहरे सौरभ भारद्वाज और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन न केवल चुनाव हार गए, बल्कि AAP भी दिल्ली की सत्ता से बाहर हो गई। अब इन दोनों नेताओं की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention of Corruption Act) के तहत इनके खिलाफ जांच की प्रक्रिया को केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से हरी झंडी मिल गई है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली सरकार के सतर्कता विभाग ने एक महीने पहले ही प्रारंभिक जांच शुरू कर दी थी। लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र से विधिवत अनुमति मांगी गई थी, जो अब मिल गई है। 

क्या है पूरा मामला?

 

इस मामले की शुरुआत दिल्ली विधानसभा के मौजूदा स्पीकर और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता विजेंद्र गुप्ता की ओर से लगाए गए आरोपों से हुई थी। उस समय, अगस्त 2024 में, वे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे। उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाया था।

विजेंद्र गुप्ता का कहना था कि AAP सरकार के कार्यकाल के दौरान अस्पतालों से जुड़े 24 बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स में जानबूझकर देरी की गई, जिससे इनकी लागत कई गुना बढ़ गई। उनके अनुसार, इन प्रोजेक्ट्स की मूल अनुमानित लागत करीब 5,590 करोड़ रुपये थी, लेकिन समय पर पूरा न होने और लापरवाही के कारण खर्च में भारी इजाफा हुआ। विजेंद्र गुप्ता की शिकायत के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने अगस्त 2024 में जांच शुरू की थी। प्रारंभिक जांच के आधार पर दिल्ली सरकार के सतर्कता विभाग ने मामले की गहराई से जांच के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मांगी थी, जो अब प्रदान कर दी गई है।

ICU प्रोजेक्ट्स में भारी गड़बड़ी का आरोप

भ्रष्टाचार के जिन मामलों को लेकर AAP के नेताओं सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन के खिलाफ जांच की मांग की गई, उनमें ICU सुविधाओं से जुड़े सात प्रमुख अस्पताल प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं। दिल्ली विधानसभा के मौजूदा स्पीकर और भाजपा नेता विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया कि इन प्रोजेक्ट्स में बड़े पैमाने पर धन का दुरुपयोग हुआ।

विजेंद्र गुप्ता के अनुसार, सितंबर 2021 में इन अस्पतालों को 1,125 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई थी और लक्ष्य था कि छह महीनों के भीतर निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाए। लेकिन तीन साल बीत जाने के बावजूद केवल 50% काम ही पूरा हो सका है। गुप्ता ने LNJP अस्पताल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां एक नया ब्लॉक बनाया जाना था, जिसकी प्रारंभिक लागत 465.22 करोड़ रुपये तय की गई थी। लेकिन समय बीतने के साथ लागत में भारी बढ़ोतरी हुई और यह आंकड़ा 1,125 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। 

सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान

एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यह मामला लापरवाही और भ्रष्टाचार की गंभीरता को दर्शाता है, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा है। विजेंद्र गुप्ता की शिकायत के आधार पर ACB ने मामले की जांच की और इसके निष्कर्ष दिल्ली सरकार के सतर्कता विभाग को सौंपे। इसके बाद सतर्कता विभाग ने मामले की गहनता से जांच के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मांगी थी। जांच पूरी होने के बाद ACB ने अपने निष्कर्ष दिल्ली के राज्यपाल के कार्यालय को भी सौंप दिए हैं, जिससे इस मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। इस वजह से सतर्कता विभाग ने केंद्र सरकार से औपचारिक जांच की अनुमति मांगी थी।

इस मामले में AAP ने क्‍या कहा ?

AAP ने आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि परियोजनाओं में देरी को भ्रष्टाचार नहीं माना जा सकता। पार्टी का मानना है कि भाजपा और दिल्ली के उपराज्यपाल ने इस देरी को भ्रष्टाचार का मुद्दा बनाकर इसे राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है, जिससे सरकार का मजाक बनाया जा रहा है।

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