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Wednesday, March 25, 2026
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मंत्री पद की जगह महायुति ने ऑफर की राज्यसभा सीट, छगन भुजबल बोले- हां कहता तो जनता के साथ धोखा होता

महायुति सरकार में जगह न मिलने के बाद छगन भुजबल का दर्द खुलकर छलका है। उन्होंने कहा है कि अगर मैं राज्यसभा सीट के प्रस्ताव को स्वीकारता तो यह मेरे विधानसभा क्षेत्र के साथ बड़ा विश्वासघात होता।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री पद न मिलने को लेकर नाराज चल रहे NCP के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें आठ दिन पहले ही राज्यसभा की सदस्यता की पेशकश की गई थी। लेकिन उन्होंने इस पेशकश को अस्वीकार कर दिया था। बता दें कि छगन भुजबल महाराष्ट्र के नासिक जिले के येवला से विधायक हैं। NCP के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने 16 दिसंबर 2024 को नागपुर में मीडिया से कहा था कि मैंने आठ दिन पहले ही राज्यसभा सीट के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था, क्योंकि अगर मैं इस प्रस्ताव को स्वीकार करता तो यह मेरे विधानसभा क्षेत्र के साथ बड़ा विश्वासघात होता, जहां से मैंने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 को जीता है।

राज्यसभा की सदस्यता की पेशकश को ठुकराया: छगन भुजबल

छगन भुजबल ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि जब वह इस वर्ष की शुरुआत में राज्यसभा में जाना चाहते थे, तो उनसे कहा गया कि उन्हें महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहिए। इसके बाद छगन भुजबल ने कहा कि उन्हें आठ दिन पहले ही राज्यसभा की सदस्यता की पेशकश की गई थी। जिसको उन्होंने अस्वीकार कर दिया था। उन्होंने इसको लेकर कहा था कि वह एक या दो साल बाद राज्यसभा के विकल्प पर विचार कर सकते हैं, लेकिन इसपर तुरंत फैसला नहीं कर सकते हैं।  

मनोज जरांगे का विरोध करने के कारण नही मिला मंत्रीपद: छगन

छगन भुजबल ने मीडिया को बताया कि महायुति सरकार में जगह न मिलने के बाद से उन्होंने NCP प्रमुख और उपमुख्यमंत्री अजित पवार से बात नहीं की है। महाराष्ट्र के बड़े ओबीसी नेता छगन भुजबल ने दावा किया है कि उन्हें महायुति सरकार में इसलिए जगह नहीं दी है, क्योंकि उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे का जमकर विरोध किया था। बता दें कि मनोज जरांगे महाराष्ट्र की नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय के लिए अलग से आरक्षण की मांग कर रहे हैं।

“मंत्रीपद तो आते जाते रहते हैं, लेकिन मुझे मिटाया नहीं जा सकता”

छगन भुजबल से मीडिया ने जब उनके भविष्य को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि वह एक साधारण राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उन्हें दरकिनार किया जाता है या पुरस्कृत किया जाता है। छगन भुजबल ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि मंत्रिपद तो आते जाते रहते हैं, लेकिन उन्हें मिटाया नहीं जा सकता।

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