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Saturday, March 21, 2026
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Jammu and Kashmir: टेरर फंडिंग मामले में बारामुला से सांसद इंजीनियर राशीद को दिल्ली कोर्ट ने दी अंतरिम जमानत

बारामुला से सांसद इंजीनियर राशीद को दिल्ली कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी है। उन्हें 2 अक्टूबर तक के लिए दिल्ली कोर्ट के द्वारा राहत दी गई है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। टेरर फंडिंग मामले में जेल में बंद बारामुला से सांसद इंजीनियर राशीद को दिल्ली कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी है। उन्हें 2 अक्टूबर तक के लिए दिल्ली कोर्ट के द्वारा राहत दी गई है। दिल्ली कोर्ट ने जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में प्रचार करने के लिए इंजीनियर राशीद को जमानत दी है।

शेख अब्दुल राशिद ने जेल से जीता था लोकसभा चुनाव

इंजीनियर राशिद के नाम से मशहूर शेख अब्दुल राशिद ने जेल में रहते हुए ही बारामूला से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा था। उन्होंने लोकसभा चुनाव में जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को बड़े अंतर से हराया था। अब जम्मू और कश्मीर में विधानसभा चुनाव होने हैं। आवामी इत्तेहाद पार्टी (AIP) आगामी विधानसभा चुनाव इंजीनियर राशिद के नेतृत्व में लड़ने जा रही है। 

राशिद के बेटे ने संभाली थी चुनाव प्रचार की कमान

इंजीनियर राशिद के बेटे अबरार राशिद ने संसदीय चुनावों में अपने पिता इंजीनियर राशिद के लिए चुनाव प्रचार की कमान संभाली थी। AIP के चुनावी अभियान का अबरार ही नेतृत्व कर रहे हैं। इसी को लेकर राशिद ने कोर्ट से जमानत मांगी थी। जिसे पटियाला हाउस कोर्ट ने 2 अक्टूबर 2024 तक के लिए उनको जमानत दे दी है। हालांकि अभी नियमित जमानत याचिका पर कोर्ट का आदेश अभी लंबित है।

5 जुलाई को मिली थी कस्टडी पैरोल

बता दें कि, 5 जुलाई को अदालत ने लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद राशिद को शपथ ग्रहण करने के लिए कस्टडी पैरोल दी थी। राशिद 2019 से जेल में है। उन्हें 2017 के आतंक फंडिग मामले में NIA के द्वारा गिरफ्तार किया गया था। इस समय राशिद दिल्ली की तिहाड़ जेल में कैद हैं।

कश्मीरी व्यवसायी जहूर वटाली के दौरान पहली बार नाम आया था सामने

पहली बार इंजीनियर राशिद का नाम कश्मीरी व्यवसायी जहूर वटाली की जांच के दौरान मामले में सामने आया था। NIA ने कश्मीर घाटी में आतंकवादी ग्रुपों और अलगाववादियों को कथित रूप से फंडिंग करने के आरोप में राशिद को गिरफ्तार किया था।

इसी केस में यासीन मलिक को मिली थी आजीवन कारावास की सजा

NIA ने जहूर वटाली मामले की जांच के दौरान कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक, हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन और लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद समेत कई लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। आरोपों में दोषी ठहराए जाने के बाद यासीन मलिक को 2022 में एक ट्रायल कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

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