नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। नवरात्र के दौरान व्रतधारी फलाहारी खाद्य पदार्थ ही खाते हैं। ऐसे में हरियाणा के अंबाला और यमुनानगर में कुट्टू और सामक के चावल में मिलावट का मामला सामने आया है। यहां 120 से अधिक व्रतधारियों की तबीयत मिलावटी भोजन खाने के बाद बिगड़ गई। जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है, इनमें बच्चे व बुजुर्ग भी शामिल हैं। इस मामले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने सैंपल लेकर जांच शुरू कर दी है।
सभी लोगों ने अलग-अलग दुकानों से आटा खरीदा था
मिली जानकारी के अनुसार अंबाला में 27 और यमुनानगर में 93 लोग मिलावटी व्रत का आटा खाने के बाद बीमार हुए हैं। हांलाकि अधिकतर व्रतधारियों को प्रारंभिक उपचार के बाद डिस्चार्ज मिल गया है। यमुनानगर में बीमार होने वाले लोग साढौरा व आसपास के गांव के हैं। बताया जा रहा है कि बीमार हुए सभी लोगों ने अलग-अलग दुकानों से आटा खरीदा था। इन दुकानों पर भी आटा खारा कुआं साढौरा स्थित भाटिया चक्की से सप्लाई हुआ था। वहीं खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने करियाना दुकानों व जिस चक्की से आटा सप्लाई हुआ, वहां से पांच सैंपल लिये हैं।
पेट दर्द, उल्टी व कंपकंपी की शिकायत
मरीजों का कहना है कि उन्होंने नवरात्र के पहले दिन सभी ने व्रत रखा था। व्रत में वह स्वांक का आटा खा रहे थे, जिसकी वजह से सभी लोग अचानक बीमार पड़ गए। सभी को साढौरा के सीएचसी व दूसरे प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मरीजों में पेट दर्द, उल्टी की शिकायत सामने आई है। फिलहाल 21 मरीज अस्पताल में दाखिल हैं। इनमें से आठ साढौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 13 बिलासपुर के निजी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।
22 जिलों में 9 खाद्य सुरक्षा अधिकारी
प्रदेश के 22 जिलों में टोटल 9 खाद्य सुरक्षा अधिकारी हैं वह भी पशुपालन विभाग से डेपुटेशन पर लिये गए हैं। इनमें ज्यादातर अधिकारियों के पास तीन-तीन जिले हैं। ऐसे में दुकानदार और मिलावटखोर त्योहारी सीजन में लोगों की सेहत से खिलवाड़ करते हैं।




