नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। लोकसभा स्पीकर का पद काफी महत्वपूर्ण होता है। जिस हिसाब से अभी लोकसभा में सीटों की संख्या है, उसके अनुसार लोकसभा अध्यक्ष का पद काफी अहम हो गया है। इस बार एनडीए के दो सहयोगी दल जदयू और टीडीपी सरकार बनाने में किंगमेकर बनकर सामने आयी है। इसलिए इन दोनों दलों में से किसी एक नेता का नाम लोकसभा अध्यक्ष के लिए दिया जा सकता है। इसमें से टीडीपी के नेता का लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए समर्थन होने की ज्यादा संभावना है। क्योंकि विपक्षी दल इंडिया गठबंधन का कहना है कि अगर लोकसभा अध्यक्ष का पद टीडीपी को दिया जाता है तो वो भी टीडीपी का समर्थन करेंगे।
इस बार ओम बिरला को मोदी मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई है
इस बार ओम बिरला को मोदी मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई है, जिससे इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि ओम बिरला को फिर से लोकसभा अध्यक्ष बनाया जा सकता है। वहीं आंध्र प्रदेश में दग्गुबती पुरंदेश्वरी की लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए खूब चर्चा हो रही है। वह आंध्र प्रदेश में बीजेपी की प्रदेश अध्यक्ष हैं। उन्हें टीडीपी चंद्रबाबू नायडू का करीबी बताया जा रहा है।
ऐसे में चंद्रबाबू नायडू दग्गुबती पुरंदेश्वरी का विरोध नहीं करेंगे
दग्गुबती पुरंदेश्वरी आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम और अभिनेता रहे एनटी रामाराव की दूसरे नंबर की बेटी हैं। दग्गुबती पुरंदेश्वरी का जन्म 22 जनवरी 1959 को आंध्र प्रदेश में हुआ था। दग्गुबती पुरंदेश्वरी को दक्षिण की सुषमा स्वराज के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने अपनी स्नातक पूरा करने के बाद जेमोलॉजी में डिप्लोमा भी हासिल किया है। जिसके बाद दग्गुबती पुरंदेश्वरी ने वर्ष 1997 में हैदराबाद इंस्टीट्यूट ऑफ जेम्स एंड ज्वेलरी की स्थापना की थी।
दग्गुबती पुरंदेश्वरी टीडीपी के मुखिया और आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू की साली हैं। चंद्रबाबू नायडू जब वर्ष 1996 में अपने ससुर एनटी रामाराव को सत्ता से बाहर कर खुद आंध्र प्रदेश के सीएम बन गए थे, तो उनकी काफी आलोचना हो रही थी। लेकिन उस समय चंद्रबाबू नायडू की साली दग्गुबती पुरंदेश्वरी ने उनका समर्थन किया था। अगर बीजेपी दग्गुबती पुरंदेश्वरी को लोकसभा अध्यक्ष बनाती है तो ऐसे में चंद्रबाबू नायडू इसका विरोध नहीं करेंगे।
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