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Saturday, March 21, 2026
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PM मोदी आज करेंगे नालंदा विश्वविद्यालय के नए कैंपस का उद्घाटन, जानें क्या रहा है नालंदा का इतिहास ?

पीएम मोदी आज बुधवार को नालंदा विश्वविद्यालय का उद्घाटन करेंगे। इस दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भी रहने की उम्मीद है।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 जून को नालंदा के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वो नालंदा विश्वविद्यालय के नए कैंपस का उद्घाटन करेंगे। इस दौरान कयास लगाये जा रहे हैं कि पीएम मोदी बिहार और नालंदा विश्वविद्यालय को लेकर बड़ी घोषणाएं कर सकते हैं।

सुबह 8.30 बजे वाराणसी एयरपोर्ट से होंगे रवाना

जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी 19 जून को वाराणसी एयरपोर्ट से सुबह 8.30 बजे गया के लिए रवाना होंगे। सुबह 9.15 पर उनका विमान गया पहुंचेगा। यहां से सेना के हेलीकॉप्टर में वो नालंदा के लिए रवाना होंगे। नालंदा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नालंदा आगमन पर नालंदा में विशेष तैयारी चल रही है। आइये जानते हैं कि नालंदा विश्वविद्यालय का क्या इतिहास रहा है और कैसे नालंदा एक खंडहर में तब्दील हो गया।

427 ईस्वी में की गई थी नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना

नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 427 ईस्वी में हुई। इसकी स्थापना गुप्त वंश के शासकों ने की। ये दुनिया का पहला रिहायशी विश्वविद्यालय है। जहां पर छात्रों को रहने की सुविधा दी गई। एक समय यहां पर 10 हजार छात्र पढ़ रहे थे। उस समय विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में 90 लाख किताबों का संग्रह था। यहां पर चिकित्सा, गणित, तर्क और बौद्ध धर्म के सिद्धांतों की पढ़ाई होती थी। इस विश्वविद्यालय की स्थापना करने वाले शासक हिंदू थे लेकिन उन्हें बौध धर्म की तार्किकता से काफी लगाव था। जिसके चलते उन्होंने इस विश्वविद्यालय की स्थापना की।

ऑक्सफोर्ड से भी 500 साल पुराना था नालंदा विश्वविद्यालय

नालंदा विश्वविद्यालय ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और बेलोग्रा विश्वविद्यालय से भी 500 साल पुराना था। नालंदा विश्वविद्यालय ने लंबे समय तक एशिया महाद्वीप के दृष्टिकोण को गढ़ता रहा, लेकिन फिर 1190 का साल आता है। जब तुर्क-अफगान सैन्य जनरल बख्तियार खिलजी नालंदा में घुसता है। खिलजी के नेतृत्व में उसकी सैन्य टुकड़ी ने पूरे विश्वविद्यालय को आग के हवाले कर देती है। जिसमें इस विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी भी शामिल होती है। 

3 महीने तक जलता रहा विश्वविद्यालय परिसर

कहा जाता है कि हमलावरों के आग लगाने के बाद परिसर तीन महीने तक जलता रहा। पुस्तकालय में ताड़ के पत्तों पर हाथ से लिखी 90 लाख पांडुलिपियां दुनिया में बौद्ध ज्ञान का सबसे समृद्ध भंडार थीं। कहा जाता है कि जब परिसर में आक्रमणकारियों ने आग लगाई तो अपनी जान बचाने में कामयाब रहे कुछ छात्र कुछ हस्तलिखित पांडुलिपियां बचा लिया। जिसे आजकल लॉस एजिल्स काउंटी म्यूजियम ऑफ आर्ट और तिब्बत के यारलुंग म्यूजियम में देखा जा सकता है। 

अब आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नालंदा विश्वविद्यालय के नए कैंपस का उद्घाटन करके इस ऐतिहासिक और बेमिशाल विश्वविद्यालय का दूसरा अध्याय शुरू करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के रहने की उम्मीद है। 

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