नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । मणिपुर की राजनीति एक बार फिर करवट लेती दिख रही है। राज्य में शुक्रवार शाम भारतीय जनता पार्टी के कम से कम 23 विधायकों ने इम्फाल के संजेनथोंग स्थित पूर्व मंत्री थोंगम विश्वजीत सिंह के आधिकारिक आवास पर एक अहम बैठक की। लंबे समय से जारी राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक तनाव के बीच हुई इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक का निष्कर्ष इस बात पर निकला कि व्यक्तिगत हितों को दरकिनार कर राज्य के व्यापक हित में एकजुट होकर आगे बढ़ा जाए। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब दो दिन पहले भाजपा विधायक थोकचोम राधेश्याम ने दावा किया था कि 44 विधायक नई सरकार के गठन को लेकर एकमत हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि सभी विधायक जनभावनाओं के अनुरूप कार्य करने को तैयार हैं। हालांकि, यह उल्लेखनीय है कि इस कथित समर्थन में 10 कुकी-जो समुदाय से आने वाले विधायक और कांग्रेस के 5 विधायक शामिल नहीं हैं।
भाजपा विधायकों ने किया साझा बयान जारी
बैठक के बाद जारी एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में मणिपुर के भाजपा विधायकों ने राज्य में शांति, सामाजिक समरसता और एकता की बहाली के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता व्यक्त की। बयान में यह स्पष्ट किया गया कि सभी विधायक व्यक्तिगत आकांक्षाओं को पीछे छोड़ते हुए राज्य, जनता और भाजपा गठबंधन की साझा सोच के व्यापक हित में आगे बढ़ने का संकल्प ले चुके हैं। प्रेस बयान में पिछले दो वर्षों में मणिपुरवासियों द्वारा झेली गई पीड़ा और अस्थिरता को गंभीरता से स्वीकार किया गया। विधायकों ने इस बात पर बल दिया कि राज्य को अब एक दीर्घकालिक और समावेशी समाधान की आवश्यकता है, जो सभी समुदायों को साथ लेकर चले।
विधायकों ने रखे ये सुझाव
विचार-विमर्श के दौरान भाजपा विधायकों ने मणिपुर में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच लंबे समय से चली आ रही कटुता को समाप्त करने के लिए एक निष्पक्ष और तटस्थ संवाद मंच की आवश्यकता पर सहमति जताई। उन्होंने राज्यपाल और केंद्र सरकार से यह अनुरोध करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की कि शांति स्थापना के लिए किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति या शांति दूतों के एक पैनल को नियुक्त किया जाए, जो निष्पक्ष मध्यस्थता कर सके और दोनों समुदायों के बीच गहराते अविश्वास को दूर कर सके।
विधायकों ने इस बात पर भी जोर दिया कि स्थायी समाधान के लिए संवाद केवल राजनीतिक स्तर तक सीमित न रहे, बल्कि इसमें स्थानीय स्वशासन संस्थाएं, नागरिक समाज संगठन, छात्र यूनियनें और धार्मिक संगठनों को भी शामिल किया जाए ताकि जमीनी स्तर पर विश्वास बहाली हो सके। इसके साथ ही उन्होंने राज्य के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में संतुलित, निगरानीयुक्त निरस्त्रीकरण अभियान चलाने की आवश्यकता जताई। लूटे गए हथियारों की शीघ्र बरामदगी और केंद्रीय व राज्य सुरक्षा बलों द्वारा पूर्ण निष्पक्षता से कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात भी जोरदार ढंग से रखी गई।
ग्वालटाबी घटना के बाद संवाद की पहल शुरू करने की अपील
20 मई को ग्वालटाबी में हुई घटना के बाद उत्पन्न संवेदनशील स्थिति को ध्यान में रखते हुए भाजपा विधायकों ने सरकार से मीडिया प्रतिनिधियों और नागरिक समाज संगठनों के साथ सार्थक संवाद शुरू करने की अपील की है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस संवाद के ज़रिए आपसी समझ और सौहार्दपूर्ण समाधान की राह बनाई जा सकती है। विधायकों ने इस दिशा में हरसंभव सहयोग देने का भरोसा भी दिलाया।
शुक्रवार को हुई यह बैठक राज्य में मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियों के बीच एक स्थायी और उत्तरदायी सरकार के गठन की दिशा में भाजपा के नेतृत्व वाले प्रयासों का एक अहम पड़ाव मानी जा रही है। इस दौरान विधायकों ने समावेशी नेतृत्व की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए, राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर अधिकारियों के समर्थन के साथ मणिपुर को एकजुट और शांतिपूर्ण बनाने के अपने साझा संकल्प को फिर से दोहराया। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह घटनाक्रम मणिपुर के लिए एक संभावित निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है, खासकर ऐसे समय में जब जनता स्थिरता, उत्तरदायित्व और विश्वसनीय प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है।





