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Wednesday, April 1, 2026
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केरल के स्कूलों में बच्‍चों को पढ़ाए जायेंगे राज्यपाल के अधिकार, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह?

केरल में प्रदेश सरकार और राज्यपाल के बीच खींचतान जारी है। इस बीच यहां के शिक्षा मंत्री ने एक बड़ा ऐलान किया है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । केरल सरकार राज्यपाल की संवैधानिक भूमिकाओं को स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाने की तैयारी कर रही है। राज्य के शिक्षा मंत्री वी. सिवनकुट्टी ने हाल ही में घोषणा की कि जल्द ही स्कूली पाठ्यक्रम में एक नया अध्याय जोड़ा जाएगा, जिसमें राज्यपाल के अधिकार, शक्तियां और जिम्मेदारियों की जानकारी दी जाएगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब केरल में राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री वी. सिवनकुट्टी मंच छोड़कर चले गए थे। यह कार्यक्रम तिरुवनंतपुरम में राजभवन द्वारा आयोजित किया गया था, जहां मंत्री ने मंच पर आरएसएस से जुड़ी भारत माता की तस्वीर पर आपत्ति जताई थी।

राज्यपाल की शक्तियों वाला पाठ कौन सी कक्षा में होगा शामिल?

केरल के शिक्षा मंत्री वी. सिवनकुट्टी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि राज्यपालों के संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों से संबंधित एक नया पाठ स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। यह अध्याय सबसे पहले इस वर्ष कक्षा 10 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक के दूसरे भाग में जोड़ा जाएगा। इसके अलावा, कक्षा 11 और 12 की पाठ्यपुस्तकों में भी इस विषय को पाठ्यक्रम संशोधन के तहत शामिल किया जाएगा।

मंत्री ने कहा कि स्कूलें लोकतांत्रिक मूल्यों को समझने और अपनाने की सबसे उपयुक्त जगह होती हैं। इसलिए पाठ्यक्रम को संविधान के मूल सिद्धांतों के अनुरूप संशोधित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में देश में निर्वाचित राज्य सरकारों को अस्थिर करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है, ऐसे में छात्रों को संवैधानिक व्यवस्था की सही जानकारी देना जरूरी हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल ही में अपने फैसलों में यह स्पष्ट किया है कि राज्यपालों के अधिकार सीमित और संविधान द्वारा परिभाषित हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की ओर संकेत

शिक्षा मंत्री ने अपने बयान में अप्रत्यक्ष रूप से सुप्रीम कोर्ट के उस महत्वपूर्ण फैसले की ओर इशारा किया, जो 8 अप्रैल को आया था। इस निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यपालों को यह निर्देश दिया था कि वे राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर निर्णय लेने या उन्हें राष्ट्रपति के पास भेजने में अनावश्यक देरी न करें और तय समय-सीमा में कार्रवाई करें। अदालत ने राष्ट्रपति के स्तर पर भी अनुमोदन की प्रक्रिया के लिए समय-सीमा तय करने की बात कही थी।

यह फैसला तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर याचिका के संदर्भ में आया था, जिसमें राज्यपाल आर. एन. रवि के व्यवहार को चुनौती दी गई थी। तमिलनाडु के साथ-साथ कई अन्य गैर-भाजपा शासित राज्यों में भी राज्यपालों और राज्य सरकारों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आती रही हैं। संविधान के अनुसार, राज्यपाल की शक्तियां सीमित होती है।

जब मंत्री वी. सिवनकुट्टी से पूछा गया कि क्या इस निर्णय का संबंध राजभवन में भारत माता के चित्र के उपयोग के विवाद से है, तो उन्होंने जवाब दिया कि उनका मानना है कि छात्रों को राज्यपालों के संवैधानिक कर्तव्यों और अधिकारों को समझना बेहद आवश्यक है। इसी कारण से इस विषय को पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा, “यह संविधान का अहम हिस्सा है और छात्रों को इससे अवगत होना चाहिए। खास बात यह है कि आज कई राज्यपालों द्वारा हस्‍तक्षेप हो रहा है, इसलिए छात्रों को सही जानकारी देना जरूरी है।”

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