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Friday, March 13, 2026
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Loksabha Election: टीएमसी का गढ़ रहा है बारासात, भाजपा से हो सकती है कांटे की टक्कर; जानें राजनीतिक इतिहास

Loksabha Election: बारासात लोकसभा सीट पर इस बार भी तृणमूल कांग्रेस ने मौजूदा सांसद काकोली घोष दस्तीदार को टिकट दिया है।

कोलकाता, (हि.स.)। लोकसभा चुनाव के ऐलान के बाद सभी पार्टियों के उम्मीदवार जोर-जोर से प्रचार प्रसार में जुट गए हैं। पश्चिम बंगाल में उत्तर 24 परगना जिले की बारासात लोकसभा सीट कई मायनों में खास है। भारत-बांग्लादेश की सीमा से सटे इस क्षेत्र के कुछ हिस्से में बांग्लादेश से आए शरणार्थी मतुआ समुदाय के लोग निवास करते हैं जो बड़े पैमाने पर चुनाव परिणाम को प्रभावित करते हैं। इस बार केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम की अधिसूचना जारी की है जिसका असर चुनाव परिणाम पर देखने को मिलेगा। एक तरफ यहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ घुसपैठ को बढ़ावा देने और बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों को संरक्षण देने के आरोप हैं। वहीं दूसरी ओर कट मनी, भ्रष्टाचार और विकास नहीं होना भी ममता बनर्जी की पार्टी और सरकार के खिलाफ मुद्दा है।

तृणमूल कांग्रेस ने मौजूदा सांसद काकोली घोष दस्तीदार को टिकट दिया है

बारासात लोकसभा सीट पर इस बार भी तृणमूल कांग्रेस ने मौजूदा सांसद काकोली घोष दस्तीदार को टिकट दिया है। भाजपा ने उनके खिलाफ स्वप्न मजूमदार को चुनाव मैदान में उतारा है। इन्हीं दोनों के बीच सीधी टक्कर के आसार हैं। फिलहाल इस सीट पर वाममोर्चा या कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार नहीं उतारा गया है।

बारासात पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले का एक शहर है

बारासात पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले का एक शहर है। यह बारासात सदर उपखंड का मुख्यालय भी है। यह क्षेत्र कोलकाता के नजदीक है और कोलकाता मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (केएमडीए) द्वारा कवर किए गए क्षेत्र का एक हिस्सा है। बंकिम चंद्र चटर्जी 19वीं सदी के दौरान 24 परगना के डिप्टी मजिस्ट्रेट हुआ करते थे। बारासात संसदीय क्षेत्र के तहत सात विधानसभाएं आती हैं। इनमें हावड़ा, अशोक नगर, राजरहाट न्यू टॉउन, बिधाननगर, मध्यमग्राम और देगंगा शामिल हैं।

यह क्षेत्र तृणमूल कांग्रेस का गढ़ रहा है

जब 1952 में देश में पहला आम चुनाव हुआ तो बारासात सीट को शांतिपुर लोकसभा सीट के नाम से जाना जाता था। उस समय कांग्रेस प्रत्याशी अरुण चंद्र गुहा चुनाव जीते। वर्ष 1998 के चुनावों में बारासात सीट की तस्वीर बदल गई और तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार यहां खाता खोला। तृणमूल के डॉ. रंजीत कुमार पांजा ने 1998 और 1999 के चुनावों में लगातार जीत हासिल की। यह क्षेत्र तृणमूल कांग्रेस का गढ़ रहा है।

पिछला जनादेश

बारासात सीट से तृणमूल कांग्रेस ने तत्कालीन सांसद काकोली घोष दस्तीदार को ही चुनाव मैदान में उतारा था, वहीं ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने हरपद बिस्वास, भाजपा ने मृणाल कांति देवनाथ, बसपा से सुकुमार बाला, कांग्रेस से सुब्रत दत्ता और शिवसेना से बानी चक्रवर्ती चुनाव लड़ रहे थे। इस सीट से तृणमूल के काकोली घोष दस्तीदार ने जीत हासिल की, उन्हें छह लाख 48 हजार 444 वोट मिले थे। जबकि भाजपा के मृणाल कांति देवनाथ पांच लाख 38 हजार 275 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के हरपद विस्वास एक लाख 24 हदार 068 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। बारासात सीट पर 81.19 फीसदी वोटिंग हुई थी।

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