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Thursday, April 9, 2026
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300 लोग नामजद और 3 ग‍िरफ्तारियां, 30 साल पुराने राम मंद‍िर से जुड़े मामले पर कर्नाटक सरकार ने की बड़ी कार्यवाही

Ram Mandir Case: कर्नाटक की कांग्रेस सरकार 1992 के राम मंदिर आंदोलन के दौरान राज्य में हुई हिंसा के केस को लेकर बड़ी कार्यवाही कर रही है।

कर्नाटक, रफ्तार डेस्क। राम मंदिर उद्घाटन का समय जैसे ही नजदीक आ रहा है। जहां भाजपा की केंद्र सरकार राम मंदिर के उद्घाटन और प्राण प्रतिष्ठा को लेकर कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती है और पूरे देश में आने वाली तारीख 22 जनवरी को एक बड़े त्यौहार के रूप में मनाने के लिए उत्साहित हैं। वहीं कर्नाटक की कांग्रेस सरकार 1992 के राम मंदिर आंदोलन के दौरान कर्नाटक में हुई हिंसा के केस को लेकर बड़ी कार्यवाही कर रही है। कर्नाटक पुलिस ने 30 साल पहले राम मंदिर आंदोलन के दौरान राज्य में हुई हिंसा के केस को फिर से खोल दिया है। दरअसल 1992 में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने राम जन्मभूमि रथ यात्रा आंदोलन शुरू किया था। उस समय पूरे देश में सांप्रदायिक दंगे हुए थे। कर्नाटक में भी उस समय खूब हिंसा हुई थी। भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी पर भी दंगे भड़काने के आरोप लगे थे। मीडिया के अनुसार भाजपा ने लाल कृष्ण आडवाणी को इस मामले में बचा लिया था।

भाजपा के नेताओं पर भी अपना शिकंजा कसने की तैयारी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक पुलिस अपनी जांच में भाजपा के उन नेताओं पर भी अपना शिकंजा कसने की तैयारी में लगी हुई है, जिनके खिलाफ दर्ज केस को कर्नाटक में भाजपा सरकार के शासनकाल में हटा दिया गया था। राम मंदिर के उद्घाटन और प्राण प्रतिष्ठा की शुभ घड़ी के समय कर्नाटक पुलिस का अचानक से इस तरह की कार्यवाही को लेकर हिन्दू संगठनों में आक्रोश है। उनका कहना है कि कर्नाटक पुलिस ऐसा जानबूझकर राम मंदिर के उद्घाटन में खलल डालने के लिए कर रही है। 30 साल पुराने केस में कार्यवाही करते हुए, कर्नाटक की हुबली पुलिस ने 5 दिसंबर 1992 को एक दुकान में आग लगाने वाले श्रीकांत पुजारी को गिरफ्तार किया है। श्रीकांत तीसरा आरोपी है। पुलिस ने अन्य 8 आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए एक विशेष टीम बनायी है। जल्द ही पुलिस उन्हें भी अपने गिरफ्त में ले लेगी।

हिंसा मामले में 300 आरोपियों की सूची बनायी है

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हुबली पुलिस ने 30 साल पहले राम मंदिर आंदोलन के समय कर्नाटक में हुई हिंसा के मामले में 300 आरोपियों की सूची बनायी है। पूरे भारत में उस समय हिंसक घटनाएं हुई थी। कर्नाटक में सबसे अधिक हिंसा हुई थी। इस दौरान एक अल्पसंख्यक की दुकान जला दी गई थी। लगभग 300 लोगो की सूची कर्नाटक पुलिस ने कार्यवाही करने के लिए बनायी है, अब इन आरोपियों की उम्र 70-75 के बीच है। कई लोग तो शहर से बाहर बस गए हैं।

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