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Wednesday, April 8, 2026
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Explainer: लोकसभा चुनाव से पहले BJP ने Google Ads पर खर्च किए 30 दिन में 30 करोड़, जानें राज्यवार आंकड़ा

New Delhi: डिजिटल भारत के साथ अब डिजिटल नेता भी देखने को मिल रहे हैं ऐसे में कौन-सी पार्टी चुनाव प्रचार में कितना पैसा खर्च करती है इस आर्टिकल में जानें।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। आगामी लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं सोशल मीडिया पर BJP का ऑनलाइन विज्ञापन छाया हुआ है। फरवरी से लेकर मार्च तक BJP ने लोकसभा चुनाव से पहले Google और YouTube सहित कई सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर राजनीतिक विज्ञापनों पर लगभग 30 करोड़ों खर्च किया है। आखिरकार डिजीटल भारत में डिजिटल एड क्यों पीछे रहे।

पहले के मुकाबले अब BJP का विज्ञापन डेटा क्या कहता है?

लोकसभा चुनाव 2019 के मुकाबले इस बार होने जा रहे लोकसभा चुनाव में BJP ने ऑनलाइन विज्ञापन में दोगुना पैसा खर्च किया है। लोकसभा चुनाव 2019 में फरवरी से मई तक Google ने 50% से अधिक वीडियो विज्ञापनों को प्लेटफॉर्म नीति का उल्लंघन पाते हुए हटा दिया था। Google ऐड ट्रांसपेरेंसी सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, BJP ने मात्र 30 दिनों में 29 जनवरी से 28 फरवरी के बीच 29.7 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। जबकि लोकसभा चुनाव 2019 में पार्टी ने 4 महीने में 12.3 करोड़ रुपये खर्च किए थे। BJP ने 12,600 से अधिक विज्ञापन स्ट्रीम किए। इसमें 75% से अधिक वीडियो शामिल थे जो की कई भाषाओं में उपलब्ध हैं। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की योजनाओं को दिखाया गया।

विज्ञापन इंडस्ट्री की लगी लॉट्री

दिनों में विज्ञापनों पर 2.99 करोड़ रुपये खर्च किए। हालांकि, कांग्रेस ने फरवरी 2024 में Google विज्ञपनों पर कोई संदेश नहीं दिया। देश की राजनीति में डिजिटल राजनीति के कदम बढ़ते जा रहे हैं। मात्र दिनों में BJP द्वारा ऑनलाइन राजनीतिक विज्ञापनों में लगभग 30 करोड़ रुपये खर्च करना विज्ञापन इंडस्ट्री में वृद्धि का संकेत देता है। BJP ने 2019 से अब तक 52,000 से अधिक विज्ञापनों के माध्यम से अपने संदेशों को फैलाने के लिए 79.16 करोड़ रुपये का निवेश किया है। बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, BJP ने फरवरी 2019 और फरवरी 2023 के बीच फेसबुक विज्ञापनों पर 33 करोड़ रुपये खर्च किए।

1-1 वीडियो पर BJP ने खर्च किए लाखों रुपये

BJP और NDA के नेताओं के अधिकांश Google विज्ञापनों पर सबसे ज्यादा उत्तर भारत के मतदाताओं पर फोकस किया गया है। दिल्ली और पंजाब जहां आम आदमी पार्टी की सरकार है। इन दो राज्यों को छोड़कर उत्तर भारत के बेल्ट पर कमल खिला है। बिहार में नीतीश कुमार के साथ NDA की सरकार बनाई हुई है। इन 30 दिनों में BJP ने एक वीडियो पर 30 लाख रुपये खर्च किए। इस वीडियो को 1 करोड़ लोगों ने देखा। इसके अलावा अन्य वीडियो में BJP ने 50 वीडियों में 10 से 30 लाख रुपये खर्च किए। 100 वीडियो पर पार्टी ने 5 से 10 लाख रुपये खर्च किए तो वहीं 124 वीडियो पर 2.5 से 5 लाख खर्च किए और 109 वीडियो पर 1 से 2.5 लाख खर्च किए।

किन राज्यों में विज्ञापनों पर कितने पैसे का हुआ खर्चा?

प्रधानमंत्री मोदी साल के पहले महीने से ही मिशन दक्षिण पर फोकस कर रहे हैं। लेकिन लेकिन ऐसा लगता है कि BJP ने कर्नाटक छोड़कर बाकी दक्षिणी राज्यों पर जहां से सीटें जीतने की उम्मीद जाता है। वहां पर ज्यादा ध्यान लगाया जा रहा है। इसके बावजुद Google ऐड ट्रांसपेरेंसी सेंटर के आंकड़ों से पता चलता है कि 2019 से अबतक इन 5 सालों में कर्नाटक में सबसे ज्यादा Google विज्ञापनों पर खर्चा किया गया है। इन राज्यों की सूचि के आंकड़ों से आपको पता चलेगा किस राज्य में कितना पैसा खर्चा किया गया।

कर्नाटक: 8.9 करोड़ रुपये

उत्तर प्रदेश: 7.76 करोड़ रुपये

दिल्ली: 6.84 करोड़ रुपये

गुजरात: 6.1 करोड़ रुपये

मध्य प्रदेश: 5.9 करोड़ रुपये

बिहार: 4.38 करोड़ रुपये

पश्चिम बंगाल: 3.46 करोड़ रुपये

तेलंगाना: 3.18 करोड़ रुपये

महाराष्ट्र: 3 करोड़ रुपये

हरियाणा: 2.6 करोड़ रुपये

Google ने भारत में राजनीतिक विज्ञापनों से इतने पैसे कमाए?

ऑनलाइन विज्ञापनों की रेस में राजनीतिक दलों के अलावा इंडियन पॉलीटिकल ऐक्शन कमिटी (I-PAC) जो कि चुनावी परामर्श और राजनीतिक अभियानों में कार्य करती है। इसके अलावा गिबस फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी रजिस्टर्ड कंपनिया ने भी मतदाताओं को टारगेट बनाने के लिए Google प्लेटफार्मों का उपयोग किया है। I-PAC ने पिछले 5 वर्षों में 9 भारतीय राज्यों में 8 करोड़ रुपये खर्च किए। इसका सबसे बड़ा हिस्सा आंध्र प्रदेश में 3.67 करोड़ रुपये खर्च किया गया। जबकि गिबस ने कांग्रेस के विज्ञापनों के लिए 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान 87.5 लाख रुपये खर्च किए। जिनमें से ज्यादातर छत्तीसगढ़ में खर्च किया गया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि कई राजनीतिक दलों और एजेंसियों द्वारा चलाए गए 99,400 विज्ञापनों के साथ Google ने 2019 से अब तक भारत से 285.56 करोड़ रुपये से अधिक का प्रोफिट कमाया।

Google ने 50% से अधिक BJP के वीडियो विज्ञापन से हटाए

Google की विज्ञापन ट्रांसपेरेंसी डिपोजटरी से पता चलता है कंपनी की नीतियों का उल्लंघन करने के तहत Google ने BJP के 50% से अधिक वीडियो हटा दिए हैं इन विज्ञापनों को उनके राजनीतिक कंटेट की वजह से हटाया गया। अल्फाबेट का मालिक Google राजनीतिक दलों को तीन सुविधाएं प्रदान करता है जिसमें Google Search, वेबसाइटों और एप्लिकेशन में फैला इसका डिस्प्ले नेटवर्क और YouTube लेकिन इन तीनों के अलावा Google राजनीतिक पार्टियों को बड़े लेवल पर जनता के लिए राजनीतिक विज्ञापन की अनुमति नहीं देता है। इसी के साथ Google राजनीतिक दलों के लिए किसी भी क्षेत्र की जनसंख्या की उम्र, लिंग, लोकशन और पोस्टल कोट को सीमित कर देता है। Google के शब्दों से राजनीतिक दलों को एड प्लेसमेंट, टॉपिक, किसी भी टॉपिक के बारे में कीवर्ड, एप पेज और वीडियों की अनुमति देता है। हालांकि Google राजनीतिक दलों को जनता के लिए गंभीर राजनीतिक विज्ञापन करने की अनुमति नहीं देता है। जिनमें जनता को टारगेट बनाना या रीमार्केटिंग और कस्टमर मेच शामिल हो। यह अबतक स्पष्ट नहीं है कि Google ने इन वीडियों को क्यों हटाया है। Google ने इस बात पर कहा कि राजनीतिक दल ने कंपनी की पॉलिसी की उल्लंघ किया है। इसलिए Google से विज्ञापनों को हटाना पड़ा। Google ने जिन वीडियो को डिलीट किया है उसे कोई भी अब नहीं देख सकता।

भारत चुनाव आयोग ने जारी किया अहम निर्देश

भारत चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए कंपेनडियम ऑफ इंस्ट्रक्शन के तहत आदर्श आचार संहिता संबंधित निर्देश उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों द्वारा सोशल मीडिया वेबसाइटों सहित इंटरनेट पर पोस्ट की जाने वाली कंटेंट औप विज्ञापनों पर लागू होते हैं। Google विज्ञापन ट्रांसपेरेंसी डेटा के मुताबिक कूलिंग पीरियड में भी BJP का विज्ञापन Google पर जारी रहा। जबकि चुनाव आयोग ने इस पर रोक लगाई हुई है। चुनाव आयोग के अनुसार, कूलिंग पीरियड उस समय को कहते है जब चुनाव प्रचार समाप्त हो जाता है और राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को राजनीतिक संदेश देने से रोक दिया जाता है। ऐसे में किसी भी दल को विज्ञापन करने की अनुमति नहीं होती है।

BJP ने कब किया विज्ञापनों के साथ उल्लंघन?

Google ऐड ट्रांसपेरेंसी सेंटर के अनुसार, लोकसभा चुनाव 2019 में 11 अप्रैल से 19 मई तक 7 चरणों में लोकसभा चुनाव हुए। BJP ने 6 अप्रैल से 17 मई तक लगातार राजनीतिक विज्ञापनों के साथ कई राज्यों में मतदाताओं को टारगेट बनाया। इसके बाद भी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के चुनाव 10 फरवरी से 7 मार्च तक हुए। इस दौरान भी BJP ने 4 मार्च तक राजनीतिक विज्ञापनों को जारी रखा। हालांकि, विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी ने 6 महीने पहले यानि अक्टूबर 2021 में चुनाव प्रचार शुरु कर दिया था।

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