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Wednesday, April 8, 2026
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Bihar Politics: लालू यादव के गले की हड्डी बने थे सुशील मोदी, जब चारा घोटाले का किया खुलासा

Patna News: सुशील मोदी 1974 में अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर जेपी आंदोलन में कूद पड़े। 1975 में आपातकाल के समय वे 19 महीनों तक जेल में रहे।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। बिहार की राजनीति में अपना परचम लहराने वाले बीजेपी के दिग्गज नेता सुशील मोदी का 13 मई को कैंसर के चलते दिल्ली के AIIMS अस्पताल में निधन हो गया। उनकी निधन से पक्ष-विपक्ष सभी में शोक की लहर है। बिहार में बीजेपी को सत्ता लाने में सुशिल मोदी ने अहम भूमिका निभाई।

पढ़ाई छोड़कर जेपी आंदोलन में कूदे सुशील मोदी

सुशील मोदी का पूरा नाम सुशील कुमार मोदी है। उनका जन्म 5 जनवरी, 1952 को पटना में हुआ था। उनके पिता का नाम मोती लाल मोदी था और उनकी मां का नाम रत्ना मोदी था। उन्होंने पटना के सेंट माइकल्स स्कूल से पढ़ाई की। साल 1973 में उन्होंने पटना साइंस कॉलेज से बॉटनी में B.Sc में डिग्री हासिल की। उसके बाद वे बॉटनी में M.Sc के लिए पटना यूनिवर्सिटी गए लेकिन बीच में ही उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ दी। 1974 में बिहार में जेपी आंदोलन की लहर थी। जय प्रकाश नारायण ने केंद्र में बैठी कांग्रेस की इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ विशाल आंदोलन का आहवाहन किया था जो कि महीनों चला था। जेपी नारायण से प्रेरित होकर सुशील कुमार मोदी भी आंदोलन में कूद पड़े। इसी आंदोलन ने बिहार को बड़े-बड़े नेताओं की सौगात दी जिनमें सुशील कुमार मोदी से लेकर रामविलास पासवान, लालू यादव और मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित होने वाले कर्पूरी ठाकुर का नाम भी शामिल है। साल 1987 में उन्होंने मुंबई की रहने वाली जेसी जॉर्ज से शादी की। दोनों कॉलेज के दिनों में मिले थे, दोनों एक-दूसरे को चाहने लगे थे। इन दोनों के दो बेटे हैं।

ऐसे शुरु हुई राजनीतिक यात्रा

कॉलेज के दिनों में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के स्टेट प्रेसिडेंट थे। कॉलेज के दिनों से ही उनमें राजनीति कूट-कूट के भरी थी। 1975 में आपातकाल के समय सुशील मोदी 19 महीनों तक जेल में रहे। वे राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के भी सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने पटना में रेडीमेड कपड़े का व्यपार भी किया था। लेकिन उसमें उनका मन नहीं लगा। उन्होंने बिहार की जनता के लिए अपना जीवल समर्पित कर दिया। 1990 में वे पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय हो गए। उन्होंने राजनीति की पारी भारतीय जनता पार्टी से शुरु की। हालांकि, उस समय बीजेपी बिहार में विपक्ष पार्टी थी। 1990 में वे पहली बार पटना सेंट्रल से विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बने। 1995 और 2000 में वो फिर विधानसभा पहुंचे। साल 2000 में उन्होंने नीतीश कुमार के साथ छोटे समय के लिए बिहार में सरकार बनाई।

बिहार में बीजेपी को सत्ता में लाने में निभाई अहम भूमिका

साल 2004 में सुशील मोदी भागलपुर से लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने। 2005 में जब बिहार में NDA की सरकार बनी तब उन्होंने सांसद की सदस्यता से स्तीफा दे दिया। उस समय JDU के सुप्रीम नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने और सुशील कुमार ने डिप्टी सीएम का कार्यभार संभाला। इस बीच उन्होंने बिहार वित्त मंत्रालय के अलावा कई अन्य मंत्रालयों में अपनी छाप छोड़ी।

चारा घोटाले का किया खुलासा

सुशील मोदी 1996 से लेकर 2004 तक बिहार में नेता प्रतिपक्ष रहे। आपको बता दें कि लालू यादव और उनके परिवार के गले की हड्डी बनी चारा घोटाला मामले में सुशील मोदी ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने पटना हाई कोर्ट नें जनहित याचिका दर्ज की जिसके बाद चारा घोटाले का लोगों के सामने खुलासा हुआ। लालू यादव को कोर्ट ने चारा घोटाला मामले में मुख्य आरोपी पाया है। लालू यादव इस समय खराब सेहत के चलते जमानत पर बाहर हैं। इस घोटाले में लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और बेटी मीसा भारती का नाम भी शामिल है।

JDU-RJD गठबंधन में डाली फूट

साल 2022 में बिहार की राजनीति में NDA के ऊपर तब समस्याओं का सैलाब उमड़ा जब बिहार में बीजेपी के पुराने साथी नीतीश कुमार ने NDA का दामन छोड़कर RJD का दामन थाम लिया। 2022 में नीतीश कुमार ने 5 साल के कार्यकाल में दूसरी बार मुख्यमंत्री का शपथ ली। वहीं दूसरी ओर, लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव ने डिप्टी सीएम की शपथ ली। उसके बाद से बीजेपी ने बिहार में जंगल राज का नारा लगाना शुरु किया। JDU-RJD गठबंधन ने बिहार में लगभग 14 महीने की सरकार चलाई। बीजेपी भी कहां चुप रहने वाली थी। 1 साल में सुशील मोदी ने ऐसा राजनीतिक खेल खेला कि RJD मुंह ताकती रह गई और सुशील मोदी एक के बाद एक सभी खेल जीतते रहे। 2023 में बिहार में फिर से NDA की सरकार बनी। जिसको बनाने में सुशील कुमार का हाथ रहा।

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