नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क | आज के तनाव भरे दौर में सिरदर्द से शायद ही कोई बचा रहता है। सिरदर्द में अलग अलग तरह की वजह बताया जाता है। इसमें कई तरह की वर्किंग प्लेस में काम का दबाव से लेकर परिवारिक समस्याएं भी मौजूद हैं। इसमें कई सारी वजह है जो माइग्रेन बढ़ा सकती हैं। इसमें माइग्रेन से होने वाला दर्द आपको काफी परेशान कर सकता है। वहीं माइग्रेन की वजह से महिलाओं और पुरुष दोनों ही प्रभावित होना शुरु हो जाते हैं। वहीं माइग्रेन के बारे में विस्तार से जानकारी चेक करते हैं।
माइग्रेन में मिलते हैं ये संकेत
माइग्रेन से परेशान होने वालों को काफी तेजी से सिर का दर्द होने लगता है। इसके कारण तो कई लोगों को उल्टी और मतली से काफी परेशानी हो जाती है।कई ऐसे लोग भी होते हैं जिनको तेज रोशनी और आवाज की वजह से भी दिक्कत हो सकती है। माइग्रेन का दर्द काफी ज्यादा प्रभावित करता है। ये काफी दिनों तक जारी रहता है। इससे आराम पानै के लिए कुछ लोग स्वंय को कमरे में बन्द करते हैं। वहीं वैश्विक स्तर पर 800 मिलियन से ज्यादा लोग इस बीामारी से पीड़ित हो चुके हैं। अमेरिका में 12 फीसदी आबादी का माइग्रेन की दिक्कत होती है। इसमें महिलाओं की संख्या काफी ज्यादा मानी जा रही है।
एक पुरुष के मुकाबले तीन महिलाओं को माइग्रेन होता है। खासतौर से 18-49 एज ग्रुप वाली महिलाएं माइग्रेन से परेशान हैं।
माइग्रेन से हार्मोन का भी रहता है अहम रोल
जानकारी के मुताबिक महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले में माइग्रेन काफी ज्यादा देर तक होता है। उनको दवा की भी काफी जरुरत पड़ जाती है। इसके अलावा एनजाइटी का भी सामना करना पड़ जाता है। वहीं अब इसको लेकर न्यूरोलाॅजिस्ट माइग्रेन और हार्मोन्स में कुछ कनेक्शन ढूंढने का प्रयास कर रहे हैं। न्यूरोलाॅजिस्ट ने जानकारी दिया है कि हार्मोन्स और आसपास का वातावरण भी माइग्रेन की अहम कारण हो सकता है। जिसमें जीन भी अहम भूमिका निभाता है। सेक्स हार्मोन्स रक्त कोशिकाओं के आकार में बदलाव को जिम्मेदार रहते है। जो कहीं न कहीं माइग्रेन की वजह बनने लगते हैं।
बचपन में माइग्रेन रहता है एक सामान
बचपन में लड़के और लड़कियों में माइग्रेन एक सामान रहता है। एक अध्ययन में मिली जानकारी के अनुसार पूरे विश्व में लगभग 10 फीसदी बच्चों को माइग्रेन की समस्या होती है। लड़कियां जब किशोरावस्था मे जाती हैं तो लड़कों के मुकाबले लड़कियों में माइग्रेन की समस्या ज्यादा रहती है। कुछ लड़कियों में उनके पीरियड के दौरान ये दिक्कत आती है। तो कुछ में उनके बाद ये परेशानी शुरु हो जाती है।
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