नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। वक्फ संशोधन अधिनियम को लेकर चल रहे विवाद के बीच, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को केंद्र सरकार के इस कानून पर अपनी स्थिति का बचाव किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार राज्य में वक्फ की संपत्तियों को “किसी को भी छूने की अनुमति नहीं देगी। मुख्यमंत्री का यह बयान तब आया है जब एक दिन पहले ही टीएमसी के मंत्री और जमीयत उलेमा-ए-हिंद बंगाल के अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने टिप्पणी की थी कि “अगर वक्फ संपत्तियां छीन ली गईं तो मुसलमान चुप नहीं बैठेंगे।”
वक्फ कानून पर सीएम ममता का रुख
मालदा जिले के गाजोल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने वक्फ संशोधन अधिनियम को लेकर हो रही आलोचनाओं का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह कानून भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बनाया है और उनकी सरकार ने विधानसभा में इसका विरोध किया था।
मुख्यमंत्री ने कहा, वक्फ संपत्ति कानून बीजेपी ने बनाया है। हमने विधानसभा में इसका विरोध किया और सुप्रीम कोर्ट में मामला दायर किया, जो अभी चल रहा है। जब तक हम यहां हैं, हम किसी को भी धार्मिक स्थलों को छूने नहीं देंगे। चाहे कोई भी हो, मैं किसी को भी धार्मिक स्थलों को छूने नहीं दूंगी। मैं सांप्रदायिक राजनीति नहीं करती। मुझे सभी धर्मों से प्यार है।
गौरतलब है कि कई महीनों तक इस संशोधित अधिनियम को लागू करने से इनकार करने के बाद, अब राज्य सरकार ने इसे स्वीकार कर लिया है। सरकार ने 5 दिसंबर की समय सीमा तक 82,000 वक्फ संपत्तियों का विवरण केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश जारी किए हैं, जिसकी कई अल्पसंख्यक समूहों और संगठनों ने आलोचना की है।
SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल, लगाया राजनीतिक मंशा का आरोप
वक्फ विवाद के साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर (संभावित रूप से ‘सेंसस’ या ‘सर्वे’ से जुड़ी प्रक्रिया) की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने इस प्रक्रिया के कारण हो रही मौतों का हवाला दिया और लोगों से गणना फॉर्म सही ढंग से जमा करने, सुनवाई में शामिल होने और प्रवासी मजदूरों से घर लौटने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इस कवायद का समय राजनीतिक मंशा से तय किया गया है। उन्होंने कहा, आप चुनाव से पहले ऐसा क्यों कर रहे हैं? नागरिकों को फिर से साबित करना होगा कि वे इस पद के लिए योग्य हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि फरवरी में चुनाव की तारीखों का ऐलान होगा, इसलिए केंद्र ने जानबूझकर तीन महीने पहले ऐसा किया है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह इसलिए किया गया है ताकि सरकारी मशीनरी काम न कर सके और ठप हो जाए। उन्होंने बताया कि SIR प्रक्रिया के कारण महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत बंगाल में 39 लोगों की मौत हो चुकी है और 13 लोग अस्पताल में गंभीर रूप से भर्ती हैं।
बंगाली प्रवासियों के उत्पीड़न पर भी भड़कीं
मुख्यमंत्री ने बंगाली भाषी प्रवासियों के उत्पीड़न का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में बंगाली भाषियों पर हमले और उत्पीड़न किए जा रहे हैं। उन्होंने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा, कोई बांग्ला बोलता है तो उसे बांग्लादेशी कहते हो। जो आजादी के दौरान यहां आए, उन्हें बांग्लादेशी कैसे कहते हो? आपने नोटबंदी से करोड़ों कमाए और अब SIR के नाम पर वोटबंदी करना चाहते हैं।इस पूरे घटनाक्रम में, ममता बनर्जी ने एक तरफ वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने केंद्र की SIR/जनगणना प्रक्रिया की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया है।





