नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की लड़ाई शुरु हो चुकी है। सभी पार्टियां न सिर्फ अपनी जीती हुई सीटों को मजबूत कर रही हैं बल्कि उन सीटों को भी साधने में कोई कमी नहीं छोड़ रही जिन पर उनकी उपस्थिति न के बराबर है। ऐसी ही एक सीट रानीगंज विधानसभा भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए घमासान के बीच Raniganj Seat चर्चा का विषय बनी हुई है। इस सीट पर टीएमसी और सीपीआई की स्थिति काफी मजबूत है। निश्चित रूप से पश्चिम बंगाल के सबसे हाई-वोल्टेज चुनावी मुकाबलों में से एक होगा। ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या है इस सीट का सियासी समीकरण।
रानीगंज सीट बर्धमान जिले के अंतर्गत आती है। साल 1951 में यह सीट असतित्व में आई। इसके बाद से लेफ्ट की इस सीट पर एक तरफा बादशाहत रही। साल 1977 से 2006 तक CPI(M) ने इस सीट पर 11 बार जीत दर्ज की। हालांकि मौजूदा समय में इस सीट पर टीएमसी और बीजेपी के बीच आमने सा्मने की लड़ाई होने जा रही है।
चुनावी इतिहास में कौन सी पार्टी सबसे मजबूत?
साल 2016 के विधानसभा से बात शुरु करें तो तत्लकालीन विधानसभा चुनाव में रानीगंज सीट पर CPI(M) का दबदबा रहा। रुनु दत्ता ने यह सीट जीतकर पार्टी की झोली में डाल दी। उन्होंने टीएमसी को टक्कर देते हुए नरगिस बानो को 12,385 वोटों से परास्त कर दिया। बीजेपी के मनीष शर्मा ने 32,214 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर समाप्त किया। इसके बाद साल 2021 के विधानसभा चुनाव में स्थिति पलट गई। इस सीट से TMC के तापस बनर्जी ने जीत का परचम लहराया। बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन दिखाते हुए दूसरे नंबर पर संघंर्ष किया लेकिन तापस बनर्जी को पछाड़नें में सफल नहीं हो सकी।
Raniganj Seat के चुनाव का परिणाम-
2021: तापस बनर्जी (TMC)
2016: रुनु दत्ता (CPI (M)
2011: अली सोहराब (TMC)
2006: हराधन झा (CPI (M)
2001: बंसा गोपाल चौधरी (CPI (M)
1996: बंसा गोपाल चौधरी (CPI (M)
1991: बंसा गोपाल चौधरी (CPI (M)
1987: बंसा गोपाल चौधरी (CPI (M)
1982: हराधन रॉय (CPI (M)
1977: हराधन रॉय (CPI (M)
1972: हराधन रॉय (CPI (M)
1971: हराधन रॉय (CPI (M)
1969: हराधन रॉय (CPI (M)
1967: हराधन रॉय (CPI (M)
1962: लक्षण बागड़ी (सीपीआई)




