नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिल्ली पहुंचते ही केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वह चाणक्यपुरी स्थित बंग भवन जा रही हैं, जहां बंगाल से आए लोगों से मिलेंगी और दिल्ली पुलिस द्वारा कथित अत्याचारों की जानकारी लेंगी। ममता ने आरोप लगाया कि बंगाल को जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है और केंद्रीय एजेंसियां बीजेपी के इशारे पर काम कर रही हैं, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद और गर्म हो गया है।
दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप
ममता बनर्जी ने दिल्ली पुलिस पर बंगाल के लोगों के साथ ज्यादती करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस को संयम बरतना चाहिए और बंगाल से आए नागरिकों को परेशान करना बंद करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कई मामलों में निर्दोष लोगों को भी निशाना बनाया जा रहा है, जो केंद्रीय एजेंसियों के पक्षपातपूर्ण व्यवहार की पुष्टि करता है।
‘बीजेपी के टूल की तरह काम कर रहीं एजेंसियां’
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियां निष्पक्ष नहीं हैं, बल्कि बीजेपी के राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल की जा रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यह स्थिति लोकतंत्र के लिए खतरनाक है और स्वतंत्र न्याय तथा कानून की भावना को कमजोर कर रही है।
‘जरूरत पड़ी तो मैं खुद लड़ूंगी’
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़े शब्दों में कहा कि अगर देश में अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने वाला कोई नहीं बचा, तो वह खुद मैदान में उतरेंगी। उन्होंने साफ किया कि तृणमूल कांग्रेस पूरी मजबूती के साथ संघर्ष करेगी और बंगाल के लोगों के सम्मान, अधिकार और स्वाभिमान से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। ममता ने यह भी संकेत दिया कि दबाव और डर की राजनीति के सामने झुकने का सवाल ही नहीं उठता, और जरूरत पड़ी तो यह लड़ाई सड़क से संसद तक लड़ी जाएगी।
बंग भवन से उठेगी आवाज़
दिल्ली पहुंचकर ममता बनर्जी ने ऐलान किया कि बंग भवन में एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी, जहां पूरे मामले की सच्चाई देश के सामने रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में बैठे लोग यह नहीं जानते कि पश्चिम बंगाल में और बंगाल से आए लोगों के साथ क्या-क्या हो रहा है, इसलिए सच सामने लाना जरूरी है। ममता ने साफ किया कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, बल्कि बंगाल के लोगों के दर्द, अपमान और अधिकारों की आवाज़ बनेगी, ताकि पूरा देश हकीकत को समझ सके।





