नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । बिहार में जहां वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पूरा हो चुका है, वहीं पश्चिम बंगाल में इसकी शुरुआत फिलहाल टल गई है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर सूचित किया है कि बंगाल इस प्रक्रिया के लिए अभी तैयार नहीं है। मुख्य सचिव मनोज पंत द्वारा शुक्रवार को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मौजूदा हालात में राज्य में SIR लागू करना संभव नहीं है और इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए कम से कम दो वर्षों का समय जरूरी होगा।
बंगाल सरकार का यू-टर्न
दरअसल, पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर राज्य सरकार और मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के बीच मतभेद उभरते नजर आ रहे हैं। हाल ही में राज्य के CEO ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर बताया था कि बंगाल SIR के लिए तैयार है। लेकिन अब राज्य सरकार ने उस पत्र को अस्वीकार कर दिया है। मुख्य सचिव मनोज पंत ने तुरंत आयोग के सीईओ कार्यालय को पत्र भेजकर स्थिति स्पष्ट की और कहा कि राज्य फिलहाल इस प्रक्रिया के लिए तैयार नहीं है। सूत्रों के अनुसार, मुख्य सचिव के पत्र में नाराजगी भी जताई गई है और यह सवाल उठाया गया है कि राज्य सरकार से परामर्श किए बिना आयोग को पत्र क्यों भेजा गया।
SIR पर ममता सरकार के रुख पर बीजेपी ने साधा निशाना
पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को टालने के फैसले को लेकर भाजपा ने राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला है। केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने ममता सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, “अब सब कुछ साफ हो गया है। वे किसी भी तरह से SIR को रोकना चाहते हैं, क्योंकि अगर मतदाता सूची का निष्पक्ष और गहन संशोधन हुआ, तो रोहिंग्याओं के वोट से बनी सरकार अपनी सत्ता खो बैठेगी।” उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि चुनाव आयोग देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा।
SIR एक तमाशा बन गया है- TMC
SIR को लेकर जहां एक ओर बीजेपी और ममता सरकार के बीच टकराव बढ़ रहा है, वहीं अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। TMC प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा, “SIR के साथ एक तमाशा चल रहा है। राहुल गांधी ने जो तथ्य उजागर किए हैं, उससे यह स्पष्ट है कि वोट चोरी हो रही है। आयोग को पहले उनका जवाब देना चाहिए।” बिहार में SIR प्रक्रिया के पूरा होते ही आयोग और विपक्ष के बीच तनाव गहराने लगा है और अब यह मामला बंगाल तक पहुंच चुका है।





