नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। संसद में ‘वंदे मातरम्’ पर बहस का प्रस्ताव पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए ‘आगे कुआं, पीछे खाई’ जैसी स्थिति पैदा कर रहा है। यह मुद्दा, जो ममता बनर्जी के लिए एक बड़ी आपदा है, वहीं बीजेपी के लिए बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले एक बेहतरीन चुनावी अवसर बन गया है। बीजेपी इस राष्ट्रीय गीत को लेकर जिस हिसाब से आगे बढ़ रही है, उससे ममता बनर्जी की चुनौतियाँ बढ़ने वाली हैं।
राज्यसभा बुलेटिन पर ममता का गुस्सा
हाल ही में राज्यसभा के एक बुलेटिन में सांसदों को ‘जय हिंद’ और ‘वंदे मातरम्’ का इस्तेमाल नहीं करने की हिदायत दी गई थी, जिस पर ममता बनर्जी का गुस्सा तुरंत सामने आया था। ममता बनर्जी ने कहा, क्यों नहीं बोलेंगे? जय हिंद और वंदे मातरम हमारा राष्ट्रीय गीत है… ये हमारी आजादी का नारा है जय हिंद हमारा नेताजी का नारा है इससे जो टकराएगा चूर चूर हो जाएगा।
हालांकि, यह बयान सिर्फ एक पक्ष है। सियासी विश्लेषकों के अनुसार, ममता बनर्जी के लिए दोनों स्लोगन अलग मायने रखते हैं। वह ‘जय हिंद’ के कारण ‘वंदे मातरम्’ पर लगे रोक पर नाराजगी जाहिर कर रही हैं। बीजेपी का आरोप है कि मुस्लिम वोट बैंक के डर से ममता बनर्जी अक्सर ‘वंदे मातरम्’ या ‘भारत माता की जय’ कहने से बचती हैं।
बंकिम चंद्र चटर्जी के घर की उपेक्षा बनी मुद्दा
7 नवंबर 2025 को ‘वंदे मातरम्’ गीत को 150 साल पूरे होने पर बीजेपी ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया है।कोलकाता में ‘वंदे मातरम्’ के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी के नाम पर बनी लाइब्रेरी के रखरखाव का मामला तूल पकड़ रहा है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी को लाइब्रेरी का गेट बंद होने के कारण बैरंग लौटना पड़ा। बीजेपी ने आरोप लगाया कि जानबूझकर ऐसा किया गया।बंकिम चंद्र चटर्जी की पांचवीं पीढ़ी के वंशज सजल चटर्जी और सुमित्रा चटर्जी ने भी बीजेपी का समर्थन किया है। वंशजों का आरोप है कि टीएमसी सरकार को बंकिम चंद्र की स्मृति के रखरखाव से कोई मतलब नहीं है और उन्होंने कभी उनके परिवार की सुध नहीं ली।
तृणमूल कांग्रेस ने लाइब्रेरी की बदहाली का ठीकरा सीपीएम (लेफ्ट सरकार) पर फोड़ा है, दावा किया है कि लाइब्रेरी की प्रबंध समिति शुरू से ही सीपीएम की रही है। शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने बीजेपी पर रवींद्रनाथ टैगोर और बंकिम चंद्र चटर्जी के बीच दरार पैदा करने की ‘बाँटने की राजनीति’ करने का आरोप लगाया।
ममता के खिलाफ बंगाल में मोर्चेबंदी
वंदे मातरम् विवाद के बीच टीएमसी आंतरिक और बाहरी दोनों मोर्चों पर घिरती नजर आ रही है।टीएमसी ने अपने विधायक हुमायूं कबीर को पार्टी से सस्पेंड कर दिया है। कबीर ने 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी पर मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में नई मस्जिद की नींव रखी और 22 दिसंबर को अपनी नई पार्टी बनाने का ऐलान किया है।
हुमायूं कबीर ने AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी के साथ चुनावी गठबंधन करने का दावा किया है। ओवैसी, जो बिहार में सफलता दोहरा चुके हैं, अब बंगाल में ममता बनर्जी के लिए कड़ी चुनौती बन सकते हैं, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलेगा। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने ममता बनर्जी के स्टैंड को राजनीतिक नौटंकी बताया है। बीजेपी को यह अवसर दिख रहा है कि अगर ममता ‘वंदे मातरम्’ का विरोध करती हैं, तो बंगाली समुदाय (जो बंकिम चंद्र को पूजता है) खिलाफ जाएगा, और अगर समर्थन करती हैं, तो टीएमसी का मुस्लिम वोट बैंक नाराज होगा।





