नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। यूपी में घूमने के लिए कई प्राचीन मंदिर है जहां जाने के बाद आपकी मनोकामना पूरी हो जाती है। शारदीय नवरात्रि के मौके पर 9 दिनों तक मां दुर्गा धरती पर वास करती हैं। इस दौरान हर जगह के मंदिर में कार्यक्रम किए जाते हैं। वहीं, आप यूपी के प्राचीन मंदिर में अपने परिवार के साथ दर्शन करने जा सकते हैं। यहां के शक्तिपीठ मंदिरों को पवित्र स्थान माना जाता है जहां पर सती के अंग गिरे थे। यूपी में इन मंदिरों के दर्शन करने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।
वाराणसी
वाराणसी एक धार्मिक जगह है जहां पर लोग देश-विदेश से घूमने आते हैं। यह भगवान शिव की प्रिय नगरी है जहां पर मणिकर्णिका घाट शक्तिपीठ मौजूद है। यहां माता के विशालाक्षी और मणिकर्णी स्वरूप की पूजा होती है।
प्रयागराज
प्रयागराज की नगरी में देवी का प्रसिद्ध शक्तिपीठ मौजूद है जिसका नाम ललिता माता मंदिर है। यहां पर देवी सती के हाथ की उंगली गिरी थी। इसके बाद यहां पर माता ललिता के रूप में इसकी पूजा होती है।
त्रिकूट
रामगिरी त्रिकूट जिले में माता का शक्तिपीठ मंदिर मौजूद है यहां की खास मान्यता है कि यहां पर सती का दायाँ स्तन गिरा था। इस जगह को माता के शिवानी के रूप में पूजा की जाती है। लोग यहां माता के दर्शन करने के लिए देश-विदेश से घूमने आते हैं इस नवरात्रि आप भी प्लान बना सकते हैं।
वृंदावन
भगवान कृष्ण की नगरी वृंदावन में श्री उमा शक्तिपीठ है। इस मंदिर को कात्यायनी शक्ति पीठ भी कहते हैं। इस मंदिर की अपनी मान्यता है कि यहां पर माता के बाल के गुच्छे चूड़ामणि गिरे थे। इस तरह से वृंदावन में नवरात्रि के त्योहार पर भक्तों की भारी भीड़ माता के दर्शन के लिए लगती है।
बलरामपुर
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में देवीपाटन शक्तिपीठ मौजूद है। मंदिर को लेकर यह कहा जाता है की माता सती का पाटन वस्त्र यहां पर गिरा था। इस शक्तिपीठ में अखंड ज्योति जलाई जाती है यह भी मानता है कि त्रेता युग से लगातार यह अखंड ज्योति जल रही है।
मिर्जापुर
वाराणसी के पास मौजूद मिर्जापुर में देवी माता का एक प्राचीन मंदिर है। विंध्याचल माता मंदिर में 51 शक्तिपीठों में यह प्रमुख माना जाता है। इस जगह पर माता सती के शरीर का कोई भी अंग नहीं गिरा था लेकिन यह मानता है की देवी माता का शरीर यहां निवास करता है।




