नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि इस बार आज 31 अगस्त, रविवार को पड़ रही है। यह दिन बृजवासियों और राधा रानी के भक्तों के लिए सबसे पावन माना जाता है। जहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मथुरा में उत्सव होता है, वहीं राधा अष्टमी पर बरसाना और वृंदावन में श्रद्धा का महासागर उमड़ पड़ता है। इस खास मौके पर श्रद्धालु बृज मंडल के प्रमुख राधा मंदिरों के दर्शन करने निकलते हैं, जहां ‘लाड़ली’ के नाम का जाप वहां की हवा में भी महसूस होता है। आइए जानते हैं ऐसे पांच खास मंदिरों के बारे में, जहां राधा रानी की कृपा बरसती है।
1. राधारानी मंदिर, बरसाना
जहां राधा अब भी ‘लाड़ली’ बनकर बसती हैं, बता दे, बरसाना की पहाड़ियों पर विराजमान यह मंदिर राधा रानी का सबसे प्रसिद्ध स्थल माना जाता है। मान्यता है कि यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के परपोते राजा वज्रनाभ ने पांच हजार वर्ष पूर्व बनवाया था। राधा जी को यहां ‘लाड़ली’ के नाम से पुकारा जाता है। अष्टमी के दिन यहां भक्तों का तांता लगता है, और बरसाना ‘जय राधे’ के जयघोष से गूंज उठता है।
2. राधा रमण मंदिर, वृंदावन
मूर्ति नहीं, मुकुट है राधा की उपस्थिति का प्रतीक मानी जाती है जहां वृंदावन स्थित यह मंदिर कृष्ण के शालिग्राम रूप को समर्पित है। खास बात यह है कि यहां राधा जी की कोई प्रतिमा नहीं है, बल्कि उनके स्थान पर एक मुकुट विराजमान है। श्रद्धालु मानते हैं कि राधा रानी स्वयं यहां विराजती हैं। अष्टमी पर मंदिर में विशेष श्रृंगार और भजन-कीर्तन होता है।
3. राधा वल्लभ मंदिर, वृंदावन
जहां शिव ने भी राधा-कृष्ण भक्ति के लिए किया तप, यह मंदिर श्री हरिवंश महाप्रभु द्वारा स्थापित किया गया था। इसकी दीवारों पर राधा-कृष्ण की लीलाओं की झलक देखने को मिलती है। मंदिर से जुड़ी मान्यता है कि भगवान शिव ने राधा प्रेम पाने के लिए यहां कठोर तप किया था। अष्टमी पर यहां भजन मंडलियों की गूंज और दीपों की रौशनी भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है।
4. राधा कुंड, गोवर्धन
पुण्य स्नान से पूरी होती है मनोकामना, गोवर्धन पर्वत के पास स्थित यह कुंड राधा-कृष्ण की अमर प्रेम गाथा का साक्षी है। मान्यता है कि यहां स्नान करने से समस्त पाप कट जाते हैं और संतान की कामना भी पूर्ण होती है। राधा अष्टमी के दिन हजारों श्रद्धालु यहां डुबकी लगाते हैं।
5. रंग महल, वृंदावन
रात्रि में सजता है राधा-कृष्ण का विश्राम कक्ष, यह मंदिर एक अद्भुत रहस्य से जुड़ा है। यहां रात्रि में राधा-कृष्ण के लिए विशेष पलंग सजाया जाता है। मंदिर बंद कर दिया जाता है और जब सुबह खोला जाता है, तो पलंग और श्रृंगार अस्त-व्यस्त मिलता है। मान्यता है कि राधा-कृष्ण रात्रि में यहां आकर विश्राम करते हैं।





