नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अगर आप इस बार अक्टूबर-नवंबर में राजस्थान की सर्दियों का सुकून भरा आनंद उठाना चाहते हैं और एक शांत, भीड़-भाड़ से दूर जगह की तलाश में हैं, तो उदयपुर से करीब 48 किलोमीटर दूर बसा मेनार गांव आपके लिए बिल्कुल सही रहेगा। यह छोटा सा गांव सर्दियों में एक अद्भुत रूप ले लेता है, जब यहां हजारों प्रवासी पक्षी दूर-दराज के देशों से उड़कर आते हैं।
प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी खजाने से कम नहीं मेनार
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‘झीलों की नगरी’ कहे जाने वाले उदयपुर के पास बसा मेनार गांव अपनी शांत सुंदरता, हरियाली और पक्षी प्रेमियों के लिए बेहद खास माना जाता है। यहां के दो प्रमुख तालाब ब्रह्म तालाब और डंड तालाब, सर्दियों के दौरान प्रवासी पक्षियों का अस्थायी घर बन जाते हैं। सुबह की धुंध में जब इन तालाबों के ऊपर से पक्षियों की टोलियां उड़ान भरती हैं, तो दृश्य किसी फिल्मी सीन से कम नहीं लगता।
साइबेरिया से आते हैं मेहमान
प्रत्येक वर्ष अक्टूबर से लेकर फरवरी तक यहां साइबेरियन सारस, ग्रेटर फ्लेमिंगो, कॉमन टील, ग्रे हेरन, ओपन बिल स्टॉर्क, कॉर्मोरेंट, स्टिल्ट्स और अन्य कई पक्षी देखे जा सकते हैं। इन पक्षियों के कलरव से गांव की सुबहें जीवंत हो जाती हैं।
स्थानीय लोग करते हैं स्वागत
मेनार के लोग भी पर्यावरण संरक्षण और पक्षी सुरक्षा को लेकर सजग हैं। यहां एक खास बात यह है कि गांव के लोग इन पक्षियों को अपना “अतिथि” मानते हैं और उनका ध्यान रखते हैं। यही कारण है कि हर साल हजारों पक्षी यहां लौट कर आते हैं।
बर्ड वॉचिंग और फोटोग्राफी का स्वर्ग
यदि आप प्रकृति प्रेमी हैं या वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी में रुचि रखते हैं, तो मेनार आपको निराश नहीं करेगा। सुबह-सुबह तालाबों के किनारे बैठकर पक्षियों को कैमरे में कैद करना या दूरबीन से उनका व्यवहार देखना एक अनूठा अनुभव होता है।
कैसे पहुंचें मेनार?
स्थान: मेनार, उदयपुर से लगभग 48 किलोमीटर दूर
समय: कार या बाइक से लगभग 1 घंटे की यात्रा
रूट: उदयपुर नाथद्वारा रोड मेनार
सड़क मार्ग: अच्छी स्थिति में, निजी वाहन से यात्रा सुविधाजनक
क्या रखें साथ?
दूरबीन और कैमरा
गर्म कपड़े (सुबह और शाम ठंडी हो सकती है)
पानी की बोतल व कुछ हल्का खाना
यदि आप पक्षी प्रेमी हैं, तो पक्षी पहचानने वाली गाइडबुक या ऐप भी मददगार हो सकती है
खान-पान की सुविधा
गांव में सीमित भोजन विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन कुछ स्थानीय ढाबों पर शुद्ध देसी व्यंजन जैसे दाल-बाटी, मसाला बाटी, छाछ आदि का स्वाद लिया जा सकता है।
मेनार सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि सर्दियों में प्रकृति और पक्षियों के संगम का साक्षी स्थल है। यह जगह उन लोगों के लिए है जो शांति, प्रकृति और असली ग्रामीण भारत को करीब से महसूस करना चाहते हैं।




