नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । गर्मियों की चिलचिलाती धूप से राहत पाने और शहरों के शोरगुल से दूर शांत माहौल में कुछ सुकून भरे पल बिताने की चाहत हो, तो अधिकतर लोगों का ध्यान सीधे हिल स्टेशनों की ओर जाता है। ट्रैकिंग, कैंपिंग या महज ठंडी हवाओं के बीच एक आरामदायक छुट्टी बिताने के लिए हिल स्टेशन बेहतरीन विकल्प हैं। लेकिन यह ख्वाहिश अकेले आपकी नहीं होती, गर्मियों में घूमने के शौकीन लाखों लोग यही सोचते हैं। नतीजतन, इन खूबसूरत और लोकप्रिय हिल स्टेशनों पर इस मौसम में पर्यटकों की भीड़ उमड़ पड़ती है, जिससे कभी-कभी वहां भी शांति ढूंढ़ना मुश्किल हो जाता है।
शिमला, मनाली, मसूरी और धर्मशाला जैसे हिल स्टेशन गर्मियों में सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं। हर साल लाखों सैलानी इन जगहों पर सुकून की तलाश में पहुंचते हैं, लेकिन भीड़भाड़, ट्रैफिक जाम और बढ़ते तापमान के चलते वहां आराम से छुट्टी बिताना चुनौती बन जाता है। अगर आप भीड़ से दूर, शांत और ठंडी वादियों में छुट्टियां बिताना चाहते हैं, तो आपको उन हिल स्टेशनों की ओर रुख करना चाहिए जो खूबसूरती में शिमला या कश्मीर से कम नहीं हैं, लेकिन कम मशहूर होने के कारण अब भी शांत और सुकूनभरे हैं।
बहुत कम लोग जानते हैं कि मनाली जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल के आसपास ही ऐसे हिल स्टेशन मौजूद हैं, जो सुंदरता में किसी से कम नहीं, लेकिन फिर भी पर्यटकों की नजरों से दूर हैं। अगर आप शिमला, मनाली या मसूरी जैसी जगहों पर तो जाना चाहते हैं लेकिन वहां की भारी भीड़ से बचना भी चाहते हैं, तो अब समय है थोड़ा हटकर सोचने का। भारत में ऐसे कई ऑफबीट हिल स्टेशन हैं, जहां गर्मियों की छुट्टियां शांति, ठंडक और प्राकृतिक सुंदरता के साथ बिताई जा सकती हैं। आइए, जानते हैं कुछ ऐसे ही छुपे हुए रत्नों के बारे में, जो अब तक पर्यटन के मुख्य नक्शे से दूर हैं।
शांघड़ गांव
हिमाचल प्रदेश की सैंज घाटी में स्थित शांघड़ गांव, कुल्लू जिले का एक ऐसा अनमोल रत्न है, जिसकी खूबसूरती किसी विदेशी हिल स्टेशन से कम नहीं। यहां हरे-भरे घास के मैदान, चीड़ के घने जंगल और रंग-बिरंगे पारंपरिक घर एक अलग ही आन्दन की अनुभूति कराते हैं। इस वजह से इस गांव को ‘कुल्लू का खज्जियार’ और ‘भारत का मिनी स्विट्ज़रलैंड’ कहा जाता है। यहां आप बरशानगढ़ झरना, शंगचुल महादेव मंदिर, शांघड़ मीडोज और रैला गांव के लकड़ी से बने टावर मंदिर का आनंद ले सकते हैं, जहां आप शांति और सुंदर दृश्यों का अनुभव कर सकते हैं।
कैसे पहुंचे
आप अपने शहर से चंडीगढ़, अंबाला या जोगिंदर नगर रेलवे स्टेशन तक पहुंचे। फिर सड़क मार्ग से मनाली तक यात्रा कर सकते हैं। मनाली से सैंज घाटी के लिए आपको स्थानीय बस या टैक्सी मिल जाएगी। इसके अलावा, कुल्लू हवाई अड्डे से भंतर तक पहुंचकर सैंज के लिए बस या टैक्सी ली जा सकती है।
कनातल
अगर आप छुपे हुए खूबसूरत हिल स्टेशनों की तलाश में हैं, तो उत्तराखंड का कनातल हिल स्टेशन आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यहां पर्यटकों की संख्या कम होती है, जिससे आप बिना किसी भीड़-भाड़ के प्राकृतिक दृश्यों का आनंद ले सकते हैं और शांति से वक्त बिता सकते हैं। कनातल में आप कैंपिंग और ट्रैकिंग जैसे साहसिक गतिविधियों का भी अनुभव ले सकते हैं। यह हिल स्टेशन देहरादून से लगभग 78 किमी, मसूरी से 38 किमी और चंबा से 12 किमी दूर स्थित है, जिससे यहां तक पहुंचना काफी सुविधाजनक है।
कैसे पहुंचें
कनातल हिल स्टेशन पहुंचने के लिए आप देहरादून रेलवे स्टेशन से बस से यात्रा कर सकते हैं। अगर आप मसूरी या चंबा में हैं, तो वहां से टैक्सी या स्थानीय बसें कनातल तक जाती हैं।
कलगा गांव
अगर आप ट्रैकिंग के शौक़ीन हैं, तो कलगा गांव का रुख करें। यहां से शुरू होने वाला कलगा-बुनबुनी-खीरगंगा ट्रैक आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है। इस 28 किमी लंबे ट्रैक को पूरा करने में करीब तीन दिन का समय लग सकता है। कलगा गांव और यह ट्रैक हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित पार्वती घाटी के पुलगा डैम के पास है। ट्रैकिंग के अलावा, कलगा गांव से पहाड़ी की चोटी से मणिकर्ण घाटी का नजारा अद्भुत होता है। यहां का सूर्यास्त दृश्य तो खासतौर पर बहुत ही मनमोहक और यादगार होता है।
कैसे पहुंचे
कुल्लू जिले के भुंतर तक सड़क और हवाई मार्ग दोनों से पहुंचा जा सकता है। भुंतर हवाई अड्डे से मणिकर्ण तक 25 किलोमीटर की दूरी है और यहां तक पहुंचने के लिए बस या टैक्सी की सुविधा उपलब्ध रहती है। मणिकर्ण से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर कलगा गांव है, जहां से ट्रैकिंग की शुरुआत होती है।





