नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भगवान भोलेनाथ को रिझाने आ रहा प्रिय शिव भक्तों के लिए सावन का महीना। जिसमें श्रावण मास आते ही भगवान शिव के भक्त कांवड़ लेकर नदियों से जल भरकर पैदल यात्रा करते हैं। यह यात्रा केवल शरीर की परीक्षा नहीं, आत्मा की साधना भी होती है। सावन के पहले दिन से कांवड़ यात्रा शुरू हो जाती है, जो इस साल 11 जुलाई से शुरू होगी। कई लोग हर साल पहली बार कांवड़ यात्रा शुरू करते हैं अगर आप पहली बार कांवड़ यात्रा पर जाने का संकल्प ले रहे हैं, तो आपको कुछ ज़रूरी नियमों और तैयारियों को जानना बेहद आवश्यक है।यात्रा की तैयारी – क्या-क्या साथ रखें?
11 जुलाई से होगी शुरू
सावन के पहले दिन से कांवड़ यात्रा शुरू हो जाती है, जो इस साल 11 जुलाई से शुरू होगी। शिव भक्तों के लिए बेहद ख़ास माना जानेवाला सावन का महीना जिसमें कांवड़ यात्रा केवल शरीर की परीक्षा नहीं, आत्मा की साधना भी होती है। कई लोग इस साल भी पहली बार अपनी कांवड़ यात्रा शुरू करेंगे। ऐसे में पहली बार होने के कारण किसी न किसी गलती के हो जाने का डर रहता है। अगर आप भी पहली बार अपनी कांवड़ यात्रा शुरु करनेवाले है, तो कुछ ज़रूरी नियमों और तैयारियों को जानना जरुरी है जिसे आपको ध्यान रखनी चाहिए।
कांवड़ यात्रा शुरू करने से पहले इसके उद्देश्य को ठीक से समझना बेहद जरूरी है। यह शिव को समर्पित सेवा, श्रद्धा, और संयम का प्रतीक है। चूंकि, यात्रा पैदल की जाती है, तो इसलिए यात्रा के लिए मजबूत और आरामदायक चप्पल या जूते पहनें। अगर आपने खाली पैर यात्रा करने या किसी अन्य प्रकार की मन्नत माँगी है, तो अलग बात है। आप उसके अनुसार दूसरी तैयारी कर सकते हैं। चूंकि, सावन गर्मी और उमस का मौसम होता है और यात्रा लंबी होती है तो आपको आरामदायक जैसे कि, सूती कपड़े केसरिया या सफेद कलर के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।
सूरज की गर्मी से बचने व सिर ढकने के लिए गमछा या टोपी रख लें। रास्ते के लिए पानी की बोतल, सूखे मेवे या हल्का भोजन भी साथ रख लें। यात्रा के दौरान हल्की-फुल्की चोट लगने या शरीर में पानी की कमी होने की संभावना रहती है, तो रास्ते के लिए दवा, बैंडेज और ओआरएस घोल रख ले। मोबाइल पावर बैंक, रेनकोट या प्लास्टिक शीट छोटा टॉर्च और आईडी प्रूफ जैसी जरूरत की चीज भी रख लें।
अगर आप पहली बार यात्रा कर रहे हैं, तो अपना स्वास्थ्य का चेकअप करवा लें। ताकि, कांवर उठाने के लिए खुद को मजबूत रख सके व समूह में यात्रा करना सही माना जाता है।
कांवड़ यात्रा के नियम
कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ को ज़मीन पर न रखने की मनाही होती है ऐसा इसलिए ताकि जल खंडित ना हो। आपकी यात्रा इससे अधूरी मानी जाएगी । इसलिए, इसे हमेशा किसी स्टैंड या सहारे पर टिकाएं। साथ ही मन में या जोर से शिवमंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप व नारे लगाते चले इससे यात्रा में शक्ति मिलती है। वही यात्रा के दौरान नशा और मांसाहार से दूर रहें, साथ ही किसी से झगड़े तकरार व गुस्से से बचें। खुद भी अनुशासन रखें और जल लेने के बाद सीधा शिवलिंग पर चढ़ाएं, कांवड़ यात्रा केवल बाहरी यात्रा नहीं है, यह अहंकार से विनम्रता तक की आंतरिक यात्रा है। जो हमें धैर्य, सेवा और समर्पण सिखाती है।
हालाँकि परंपरा में कांवड़ यात्रा में पुरुषों की संख्या अधिक होती है, लेकिन अब कई महिलाएं भी यात्रा करती हैं। जो अपने सुविधाजनक वस्त्र, समूह में यात्रा, और सुरक्षा उपायों का विशेष ध्यान रखती है। इसके लिए कई जगहों पर शिविर महिलाओं के लिए भी उपलब्ध रहते हैं।




