नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संजोए रखने के लिए मशहूर है दिल्ली। रमज़ान के महीने में पुरानी दिल्ली की गलियों में इफ्तार और सेहरी की रौनक देखते ही बनती है। इस रमज़ान आप भी अपने परिवार के साथ घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो दिल्ली की इन पांच खास जगहों की सैर करें जो आपके लिए एक यादगार साबित हो सकती हैं। जानें इन खास जगहों के बारे में।
जामा मस्जिद
दिल्ली की जामा मस्जिद का रमज़ान के महीने में एक अलग ही नजारा देखने को मिलता है। जहां इस दौरान मस्जिद के आसपास के बाजार में इफ्तार के लिए तरह-तरह के व्यंजन मिलते हैं। बता दें कि जामा मस्जिद भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है। जिसे मुगल सम्राट शाहजहां ने बनवाया था। यहां हर शाम हजारों लोग इफ्तार के लिए इकट्ठा होते हैं। रमज़ान के दौरान, यहां खास पकवान तैयार होते है, जिनमें खजला, फेनी, और विभिन्न प्रकार के कबाब शामिल हैं।
हुमायूं का मकबरा
हुमायूं का मकबरा हुमायूं की बेगम हमीदा बानो बेगम ने सन्1562 ई. में बनवाया था। इस मकबरे में कुल 99 कमरे हैं, जिसको देखने यहां हर साल करोड़ों पर्यटक पहुंचते हैं। यह मकबरा दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र में स्थित है। जो कि सुबह के 6:00 बजे से शाम के 6 बजे तक खुला रहता है। यहां आप जाने के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन टिकट ले सकते है, जो कि 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नि:शुल्क है।
लोधी गार्डन
रमजान के दौरान, अपने परिवार और दोस्तों के साथ पिकनिक का आनंद लेने आप लोधी गार्डन भी जा सकते है जो कि, दिल्ली के सबसे खूबसूरत और ऐतिहासिक गार्डन में से एक माना जाता है। जहां हरियाली के बीच खुला वातावरण आपको एक सुकून भरा माहौल प्रदान करेगा। पहले यह एक गांव हुआ करता था। जिसे बाद में मार्क ऑफ विलिंगडन की पत्नी लेडी विलंगडन ने बसाया था। यहां से आप दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारकों व सुंदर झीलों का नजारा भी देख सकते हैं।
लाल किला
शाह जहां द्वारा बनवाया गया लाल किला भारत की प्रमुख ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। हर साल 15 अगस्त पर यहां तिरंगा फहराया जाता है और प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से देश की जनता को संबोधित करते हैं। लाल किला सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक खुला होता है।
सफदरजंग का मकबरा
मुगल सल्तनत की आखिरी इमारत के रूप में जानी जाने वाला सफदरजंग के मकबरे की वास्तुकला की आज भी मिसाल दी जाती है। सफदरजंग के साथ उनकी बीवी की भी कब्र इस मकबरे में है। इसे साल 1754 में सफदरजंग के बेटे व अवध के नवाब शुजा उद दौला द्वारा बनवाया गया था। इस मकबरे की पूरी इमारत लाल बलुआ पत्थर से बनी है, वहीं मुख्य गुम्बद सफेद संगरमरमर से बना हुआ है, जो अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर है। मकबरे की बड़ी-बड़ी दीवारें, बड़े-बड़े फव्वारे और मुगल गार्डन आपको आनंद का अनुभव देगें। इसके परिसर में ही एक मदरसा है और इसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा इसके मुख्य द्वार पर एक पुस्तकालय भी चलाया जाता है।





