नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट दायर उन याचिकाओं का विरोध किया है जिनमे कहा गया है कि कावड़ यात्रा के दौरान पड़ने वाली दुकानों पर नेमप्लेट लगाया जाए।
कांवड़ के दौरान शांति बनाए रखने के लिए लिया गया था फैसला
सुप्रीम कोर्ट में जमा कराए गए विस्तृत वर्णन में सरकार की ओर से कहा गया है कि यह निर्देश यात्रा के दौरान शांति बनाए रखने के लिए दिए गए थे।
हजारों शिव भक्त गंगा में लगाते है डुबकी
कावड़ यात्रा में हर साल हजारों शिव भक्त गंगा नदी से जल लेने आते हैं। दरअसल कावड़ियों ने इस रूट पर दिए जाने वाले भोजन को लेकर चिंता जाहिर की थी। जिसके बाद सरकार ने दुकानों पर नेमप्लेट लगाने के आदेश दिए थे। सरकार के इस कदम पर विपक्ष ने निशाना साधते हुए यह कदम मुस्लिम विरोधी है और समाज को विभाजित करने के लिए उठाया गया है।
22 जुलाई से शुरू हुई थी कांवड़ यात्रा
देश भर में कावड़ यात्रा सावन के पहले सोमवार 22 जुलाई से शुरू हुई थी। इस दौरान शिव मंदिरों में काफा भीड़ देखी गई। कई भक्तों ने इस दिन गंगा में डुबकी भी लगाई।
श्रद्घालुओं ने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर, वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर,मेरठ के काली पलटन, गोरखपुर के झारखंडी महादेव मंदिर में शिव भगवान के दर्शन किए।
उल्लेखनीय है कि यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से निवेदन किया कि, अदालत इस मामले में उचित आदेश जारी करें। यूपी सरकार ने कहा कि नेम प्लेट आदेश कावड़ यात्रा के दौरान सही व्यवस्थाओं के मद्देनजर जारी किया गया था। साथ ही उन्होंने कहा, यह आदेश अचानक नहीं लिया गया था बल्कि इसके पहले शीर्ष अधिकारियों की बैठक हुई और निर्धारित कानून के तहत इसे लागू करने का निर्णय लिया गया था।
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