नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारतीय क्रिकेट के सबसे जुझारू और दिलेर खिलाड़ियों में से एक युवराज सिंह ने आखिरकार अपने संन्यास के फैसले को लेकर वर्षों से बनी चुप्पी तोड़ दी है। जून 2019 में वनडे वर्ल्ड कप के बीच अचानक क्रिकेट से संन्यास लेने वाले युवराज ने सानिया मिर्जा के यूट्यूब पॉडकास्ट ‘सर्विंग इट अप विद सानिया’ में अपने मन के भाव साझा किए। युवराज ने बताया कि 2017 चैंपियंस ट्रॉफी के बाद टीम से बाहर किया जाना उनके लिए सबसे बड़ा झटका था। इसके बाद उन्हें न तो इंटरनेशनल मैचों में मौका मिला और न ही आईपीएल में वह भरोसा, जिसकी वह उम्मीद कर रहे थे। इस उपेक्षा और मानसिक तनाव ने उन्हें आखिरकार 2019 में क्रिकेट और आईपीएल दोनों से संन्यास लेने पर मजबूर कर दिया।
मैदान में भारी था मन, युवराज का खुलासा
पॉडकास्ट के दौरान युवराज ने खुलासा किया कि करियर के आखिरी दौर में उन्हें खुद को पूरी क्षमता से खेलने में मुश्किल हो रही थी। उन्होंने कहा, “सच कहूं तो उस समय मैं अपना गेम एंजॉय नहीं कर रहा था। बार-बार खुद से सवाल कर रहा था कि आखिर मैं यह खेल क्यों खेल रहा हूं। ना सपोर्ट मिला, ना सम्मान। जब आगे बढ़ ही नहीं पा रहा था, तो खुद को जबरदस्ती क्यों खींचूं।” युवराज का यह बयान न सिर्फ एक खिलाड़ी की पीड़ा दिखाता है, बल्कि उस इंसान की कहानी भी बयां करता है, जो मानसिक और शारीरिक चुनौतियों से जूझते हुए खुद को संभालने की कोशिश कर रहा था।
”खेल बोझ बन गया था”
युवराज ने अपने आखिरी दौर की कठिनाईयों को याद करते हुए कहा कि क्रिकेट, जिसे वह कभी जीते थे, वही उन्हें अंदर से तोड़ने लगा था। “जिस दिन मैंने रुकने का फैसला किया, उसी दिन खुद को दोबारा महसूस करना शुरू किया। खेल ने मुझे बहुत कुछ दिया, लेकिन जिस काम में आनंद नहीं रह गया, उससे चिपके रहना बेकार था।” उन्होंने यह भी बताया कि उस समय उनका मन बार-बार यह सोचता था कि आखिर उन्हें क्या साबित करना है।
क्रिकेट के बाद गोल्फ में मिली आज़ादी
युवराज ने गोल्फ को अपने जीवन में नई आज़ादी बताया। उन्होंने कहा कि गोल्फ एक ऐसा खेल है, जिसे वह सिर्फ अपने लिए खेलते हैं, बिना किसी टीम या देश के दबाव के। दोस्तों के साथ खेलना, हल्की-फुल्की प्रतिस्पर्धा और लंबे शॉट मारने का रोमांच मुझे क्रिकेट में लगाए गए छक्कों की याद दिलाता है। गोल्फ ने मुझे मानसिक सुकून और फिट रहने में भी मदद दी।
खेल से मोहभंग और मुश्किल फैसला
44 साल के युवराज ने स्वीकार किया कि आखिरी दौर में उन्हें खेलना अच्छा नहीं लग रहा था। उन्हें न सम्मान मिला, न सपोर्ट, और यही कारण बना कि उन्होंने संन्यास लेने का फैसला किया। युवराज ने कहा, “जब अपने ही खेल में मजा नहीं आ रहा, तो इसे जारी रखना क्यों?” यही सवाल उनके रिटायरमेंट की असली वजह बना।
”परिवार पहले, BCCI या मेंटरशिप बाद में”
भविष्य में BCCI में कोई बड़ी भूमिका निभाने के सवाल पर युवराज ने साफ कहा कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता बच्चों के साथ वक्त बिताना है। बच्चों के छोटे होने के कारण वह यह समय मिस नहीं करना चाहते। हालांकि उन्होंने माना कि भविष्य में आईपीएल में कोच या मेंटरशिप जैसी भूमिका निभाना उन्हें आकर्षित करती है, क्योंकि युवा खिलाड़ियों को मार्गदर्शन देना उन्हें पसंद है।
स्वास्थ्य और फिटनेस पर नजर
युवराज ने बताया कि रिटायरमेंट के बाद खुद को फिट रखना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अब वह अपने शरीर को बेहतर समझते हैं। चोटों को हर खिलाड़ी की जिंदगी का हिस्सा बताते हुए उन्होंने कहा कि आज के दौर में इंजरी मैनेजमेंट और फिटनेस को लेकर जागरूकता काफी बढ़ गई है, जो खिलाड़ियों को लंबे समय तक सक्रिय बनाए रखने में मदद करती है।





