नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । भारतीय एथलेटिक्स नीरज चोपड़ा ने एक बार फिर विदेशी धरती पर तिरंगा लहरा दिया है। भारत का उभरता हुआ सितारा नीरज चोपड़ा शुक्रवार (20 जून 2025) को पेरिस में एक बार फिर चमका है। नीरज चोपड़ा ने पेरिस डायमंड लीग में 88.16 मीटर का थ्रो कर इतिहास रच दिया है। नीरज की यह न केवल सीजन की पहली जीत है, बल्कि यह उनकी कुल मिलाकर पांचवीं डायमंड लीग जीत भी बन गई।
भारतीय एथलेटिक्स नीरज चोपड़ा ने यह जीत पहले ही प्रयास में हासिल की और इसके बाद के थ्रो में संघर्ष के बावजूद वे अपना लीड बरकरार रखने में कामयाब रहे। प्रतियोगिता से पहले जर्मनी के जूलियन वेबर को नीरज के लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा था। वेबर ने दोहा 2023 में नीरज को हराया था, लेकिन इस बार तस्वीर बदल गई।
नीरज को पछाड़ नहीं पाए जूलियन वेबर
नीरज ने पहले प्रयास में 88.16 मीटर का थ्रो फेंका, जबिक जूलियन वेबर ने 86.20 मीटर का। हालांकि, इसके बाद अगले 5 थ्रो में नीरज ने बढ़त बनाते हुए जूलियन वेबर को मात दी और जीत हासिल करने में कामयाब रहे। वेबर पूरी प्रतियोगिता में नीरज का पछाड़ नहीं पाए, जबकि नीरज ने स्थिरता दिखाई और अंतिम परिणाम में वेबर से आगे रहे।
दा सिल्वा ने महाद्वीपीय रिकॉर्ड तोड़ा
जब फैंस सोच रहे थे कि वाल्कोट तीसरे पायदान पर रहेंगे, तभी ब्राज़ील के मौरिसियो लुईज दा सिल्वा ने 86.20 मीटर का थ्रो कर एक बड़ा रिकॉर्ड बनाते हुए पोडियम में तीसरा स्थान अर्चित किया। यह क्षण दर्शकों के लिए अप्रत्याशित लेकिन रोमांचक रहा। नीरज की यह डायमंड लीग करियर की 5वीं जीत रही।
अब तक नीरज के नाम लॉज़ेन 2022,डायमंड लीग फ़ाइनल 2022 (ज्यूरिख), दोहा 2023, लॉज़ेन 2023 और पेरिस 2025 की जीत शामिल रही है। यह दिखाता है कि नीरज केवल एक “वन-टाइम ओलंपिक चैंपियन” नहीं, बल्कि लगातार शीर्ष प्रदर्शन करने वाले एथलीट हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े?
बता दें कि, नीरज ने 8 साल बाद पेरिस डायमंड लीग में कमबैक किया था। पिछली बार जब वे यहां जूनियर विश्व चैंपियन के रूप में आए थे, तब पांचवें स्थान पर रहे थे। अब वह टॉप पर हैं। यह सिर्फ आंकड़ों का फर्क नहीं है, यह एक दशक की मेहनत और मानसिक मजबूती का प्रमाण है।
भारतीय एथलेटिक्स में जुड़ेगा नया चैप्टर
नीरज अब 24 जून 2025 को चेक गणराज्य के ओस्ट्रावा में ‘गोल्डन स्पाइक एथलेटिक्स मीट’ में भाग लेंगे, इसके बाद वह 4 जुलाई को ‘नीरज चोपड़ा क्लासिक’ में नजर आएंगे। यह उनके नाम पर पहली बार आयोजित प्रतियोगिता होगी और भारतीय एथलेटिक्स में नया अध्याय जोड़ेगी।




