नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। टीम इंडिया के सीनियर बल्लेबाज और पूर्व कप्तान अजिंक्य रहाणे ने भारतीय क्रिकेट के सेलेक्शन सिस्टम पर करारा प्रहार किया है। रहाणे ने कहा कि भारत में खिलाड़ियों के चयन की प्रक्रिया में बड़े बदलाव की जरूरत है, क्योंकि कई खिलाड़ी सेलेक्टर्स के डर से खुलकर खेल नहीं पाते। उनका कहना है कि इससे देश का असली टैलेंट दबकर रह जाता है।
पूर्व कप्तान ने यह बयान अपने साथी क्रिकेटर चेतेश्वर पुजारा के साथ एक यूट्यूब बातचीत के दौरान दिया। रहाणे बोले- खिलाड़ियों को सेलेक्टर्स से डरना नहीं चाहिए। हमारे पास ऐसे सेलेक्टर्स होने चाहिए जो हाल ही में टॉप लेवल क्रिकेट से रिटायर हुए हों और आज के मॉडर्न क्रिकेट की मांग को समझते हों।
रहाणे ने यह भी कहा कि मौजूदा सेलेक्शन मॉडल पुराना और अप्रासंगिक हो चुका है। वर्तमान नियमों के तहत कोई भी खिलाड़ी जिसने कम से कम 10 फर्स्ट-क्लास मैच खेले हों और रिटायरमेंट को 5 साल हो चुके हों, वह डोमेस्टिक लेवल के लिए सेलेक्टर बन सकता है। लेकिन रहाणे का मानना है कि अब ऐसे लोगों की जरूरत है जो नए दौर के क्रिकेट को समझें और खिलाड़ियों की मानसिकता से जुड़ सकें।
उन्होंने साफ कहा कि क्रिकेट तेजी से बदल रहा है अब फैसले 20-30 साल पुराने नजरिए से नहीं लिए जा सकते। T20 और IPL जैसे फॉर्मेट के दौर में सेलेक्टर्स को भी आधुनिक सोच रखनी होगी।
रहाणे का यह बयान ऐसे समय आया है जब वे खुद लंबे समय से टीम इंडिया से बाहर हैं, जिससे यह माना जा रहा है कि उनकी नाराजगी सीधे तौर पर BCCI सेलेक्टर्स की कार्यप्रणाली से जुड़ी है। वहीं, चेतेश्वर पुजारा ने रहाणे की बातों से आंशिक सहमति जताते हुए कहा कि, बड़े राज्यों में यह लागू किया जा सकता है क्योंकि वहां विकल्प ज्यादा हैं, लेकिन पुराने खिलाड़ियों के अनुभव को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जाना चाहिए।
अजिंक्य रहाणे ने BCCI सेलेक्टर्स पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय खिलाड़ी डर के माहौल में खेलते हैं। उन्होंने सेलेक्शन प्रक्रिया में बड़े बदलाव की मांग की, ताकि टैलेंट को खुलकर मौका मिल सके।




