नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए ICC मेन्स T20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 फाइट में इंडिया नेशनल क्रिकेट टीम को साउथ अफ्रीका नेशनल क्रिकेट टीम के खिलाफ 76 रन की करारी हार झेलनी पड़ी और इसी के साथ टीम इंडिया का विजय रथ थम गया। यह हार सिर्फ एक बुरे दिन का नतीजा नहीं थी, बल्कि इंडियाना गलत, खराब प्रदर्शन और दबाव में बिखरने की कहानी रही।
पूरा फायदा विपक्षी बल्लेबाजों ने उठाया
मैच की शुरुआत भारत के लिए शानदार रही। साउथ अफ्रीका ने महज 20 रन पर अपने तीन शीर्ष बल्लेबाज गंवा दिए थे और लग रहा था कि भारतीय गेंदबाज मैच पर पूरी तरह शिकंजा कस लेंगे। लेकिन यहीं से कहानी पलटी। डेविड मिलर और डेवाल्ड ब्रेविस ने जिम्मेदारी संभाली और 97 रनों की विस्फोटक साझेदारी कर भारत की पकड़ ढीली कर दी। भारतीय गेंदबाज मिडिल ओवरों में लाइन-लेंथ और आक्रामक फील्डिंग बरकरार नहीं रख सके, जिसका पूरा फायदा विपक्षी बल्लेबाजों ने उठाया।
स्पिन विभाग मुकाबले में पूरी तरह बेअसर दिखा
स्पिन विभाग, जो अक्सर भारत की ताकत माना जाता है, इस मुकाबले में पूरी तरह बेअसर दिखा। वरुण चक्रवर्ती ने चार ओवर में 47 रन लुटाए, जबकि वॉशिंगटन सुंदर को सिर्फ दो ओवर दिए गए। स्पिनर्स के खाते में केवल एक विकेट आया। मिडिल ओवरों में विकेट न मिलना साउथ अफ्रीका के लिए खुलकर खेलने का न्योता साबित हुआ।
भारतीय बल्लेबाजों पर मानसिक दबाव बन गया
पारी का निर्णायक मोड़ आखिरी ओवर में आया, जब हार्दिक पांड्या ने 20 रन खर्च कर दिए। एक समय साउथ अफ्रीका 175 के आसपास रुकता दिख रहा था, लेकिन स्कोर 188 तक पहुंच गया। टी20 जैसे फॉर्मेट में अतिरिक्त 10-15 रन भी बड़ा अंतर पैदा करते हैं और यही अंतर बाद में भारतीय बल्लेबाजों पर मानसिक दबाव बन गया।
सिंगल-डबल से पारी को स्थिर करने का धैर्य
लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय ओपनर्स फिर नाकाम रहे। ईशान किशन खाता खोले बिना आउट हो गए, तिलक वर्मा सस्ते में लौटे और अभिषेक शर्मा 15 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। लगातार खराब शुरुआत ने मिडिल ऑर्डर को शुरुआत से ही दबाव में ला दिया। ऊपर से बल्लेबाजों का इंटेंट भी सवालों के घेरे में रहा ज्यादातर खिलाड़ी पहली गेंद से बड़े शॉट की कोशिश में दिखे। पिच को समझने, साझेदारी बनाने और सिंगल-डबल से पारी को स्थिर करने का धैर्य नजर नहीं आया।
अक्षर पटेल की जगह वॉशिंगटन सुंदर को मौका
टीम संयोजन पर भी सवाल उठे। अक्षर पटेल की जगह वॉशिंगटन सुंदर को मौका दिया गया, लेकिन वे न गेंद से प्रभाव छोड़ पाए और न बल्ले से। उन्हें सिर्फ दो ओवर देना टीम मैनेजमेंट की रणनीति पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। अक्षर की ऑलराउंड क्षमता को देखते हुए यह बदलाव जोखिम भरा साबित हुआ।
हर अहम मोड़ पर टीम चूकती चली गई
भारत के पास कई मौके थेशुरुआती तीन विकेट के बाद, मिडिल ओवरों में या लक्ष्य का पीछा करते समय लेकिन हर अहम मोड़ पर टीम चूकती चली गई। सामूहिक रणनीतिक गलतियां, खराब शॉट चयन और गेंदबाजी में निरंतरता की कमी ने आखिरकार भारत की सेमीफाइनल की राह मुश्किल कर दी और वर्ल्ड कप में विजय अभियान पर ब्रेक लगा दिया





