नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। भाग्यश्री, जिन्होंने 90 के दशक में अपनी मासूमियत और सादगी से दर्शकों का दिल जीता, आज एक्ट्रेस अपना जन्मदिन मना रही हैं। 23 फरवरी 1969 को मुंबई में जन्मी भाग्यश्री ने कम समय में स्टारडम हासिल किया, लेकिन फिर वह अचानक फिल्मी दुनिया से दूर हो गईं।
सुपरहिट डेब्यू और नई जोड़ी का जादू
भाग्यश्री का फिल्मी करियर 1989 में रिलीज हुई ‘मैंने प्यार किया’ से शुरू हुआ, जिसने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। फिल्म में उनके साथ थे सलमान खान, और निर्देशक सूरज बड़जात्या की यह पारिवारिक प्रेम कहानी ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़े। भाग्यश्री को फिल्म में ‘सुमन’ के किरदार से घर-घर पहचान मिली। उस समय यह भी चर्चा रही कि फिल्म के लिए उन्हें 1 लाख रुपये फीस मिली, जो सलमान की फीस से ज्यादा थी।
शर्तों पर किया डेब्यू
भाग्यश्री ने अपनी पहली फिल्म कुछ शर्तों के साथ साइन की थी, जो उनके रूढ़िवादी परिवार से जुड़ी थीं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि वह किसिंग सीन नहीं करेंगी और मर्यादित परिधान पहनेंगी। फिल्म में एक रोमांटिक सीन को फिल्माने के लिए शीशे का इस्तेमाल किया गया, ताकि उनकी शर्तों का सम्मान किया जा सके।
सफलता के बाद क्यों रुका करियर?
‘मैंने प्यार किया’ के बाद भाग्यश्री से बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन उनकी ‘त्यागी’ (1992), ‘पायल’ (1992) और ‘घर आया मेरा परदेसी’ (1993) जैसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा सफलता नहीं पा सकीं। इसके बाद, उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में भी काम किया, जहां उन्होंने रवि किशन और मनोज तिवारी जैसे कलाकारों के साथ अभिनय किया, लेकिन वहां भी उनकी सफलता सीमित रही।
पारिवारिक जीवन की प्राथमिकता
भाग्यश्री ने फिल्मी करियर के साथ अपने निजी जीवन को भी प्राथमिकता दी। महज 19 वर्ष की उम्र में, उन्होंने अपने बचपन के मित्र हिमालय दासानी से विवाह किया। इस शादी के बाद दोनों के रिश्ते में कुछ उतार-चढ़ाव भी आए, लेकिन वक्त के साथ उनका संबंध और मजबूत हुआ। आज वह दो बच्चों, अभिमन्यु और अवंतिका की मां हैं और अपने पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाए हुए हैं।
चर्चाएं और अफवाहें
सलमान खान के साथ उनकी जोड़ी को लेकर उस समय अफेयर की चर्चाएं भी थीं, हालांकि दोनों ने हमेशा इन अफवाहों को नकारा किया और इसे महज एक मीडिया का हौवा बताया।
करियर और सिद्धांतों का संतुलन
भाग्यश्री का करियर दिखाता है कि फिल्मी दुनिया में सफलता इतनी जल्दी मिल सकती है, लेकिन उसे बनाए रखना उतना ही मुश्किल होता है। भाग्यश्री ने अपने सिद्धांतों और पारिवारिक मूल्यों को हमेशा अपनी प्राथमिकता दी। उन्होंने अपनी शर्तों के अनुसार फिल्मी दुनिया में कदम रखा और बाद में अपने परिवार को समय दिया। आज भी उनकी छवि ‘सुमन’ के रूप में लोगों के दिलों में बसी हुई है, जो हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर का हिस्सा मानी जाती है।





