नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। भारतीय क्रिकेट के सबसे साहसी कप्तानों में से एक, सौरव गांगुली आज 8 जुलाई 2025 को अपना 53वां जन्मदिन मना रहे हैं। ‘दादा’ के नाम से मशहूर गांगुली ने न केवल शानदार बल्लेबाजी की, बल्कि भारतीय टीम में जीत का जज्बा भी पैदा किया।
वनडे में लगातार 4 बार ‘प्लेयर ऑफ द मैच’
1997 में गांगुली ने लगातार 4 वनडे मैचों में ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ बनने का कारनामा किया। आज तक कोई भी खिलाड़ी यह रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाया है। सौरव गांगुली एकमात्र ऐसे बल्लेबाज हैं जिन्होंने 1997 से 2000 तक हर साल 1000 से ज्यादा रन बनाए, 1997: 1338 रन, 1998: 1328 रन, 1999: 1767 रन, 2000: 1579 रन गांगुली ने वनडे क्रिकेट में 11,363 रन बनाए। वे बाएं हाथ के बल्लेबाजों में तीसरे नंबर पर हैं। उनसे आगे सिर्फ संगाकारा (14,234) और जयसूर्या (13,430) हैं।
वनडे इतिहास की सबसे बड़ी साझेदारी
गांगुली और सचिन तेंदुलकर की जोड़ी ने 176 पारियों में 8227 रन जोड़े, जो किसी भी वनडे जोड़ी की अब तक की सबसे बड़ी साझेदारी है। ये रिकॉर्ड आज भी अटूट है। 2000 की चैंपियंस ट्रॉफी (मिनी वर्ल्ड कप) के फाइनल में गांगुली ने 117 रन की शानदार पारी खेली थी। आज तक किसी भी चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में इससे बड़ी पारी नहीं बनी।
वर्ल्ड कप में भारत की सबसे बड़ी पारी
1999 वर्ल्ड कप में श्रीलंका के खिलाफ 183 रन बनाकर गांगुली ने भारत की तरफ से वर्ल्ड कप में अब तक की सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी खेली। यह रिकॉर्ड अब तक कायम है। गांगुली ने 2007 में पाकिस्तान के खिलाफ 239 रन बनाए थे, जो किसी भारतीय बाएं हाथ के बल्लेबाज द्वारा टेस्ट में सबसे बड़ा स्कोर है। गांगुली को उनके आक्रामक कप्तानी अंदाज और युवाओं को मौका देने के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने ही टीम में वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह, जहीर खान, युवराज सिंह और एम.एस. धोनी जैसे खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका दिया। गांगुली का योगदान शब्दों में नहीं समाया जा सकता। उन्होंने भारत को सिर्फ जीतना नहीं सिखाया, बल्कि डर के बिना खेलना भी सिखाया। आज जब क्रिकेट का हर रिकॉर्ड किसी न किसी दिन टूटता है, दादा के कई रिकॉर्ड अब भी अडिग हैं।




