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Tuesday, March 17, 2026
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Solar Storm: धरती से टकराया शक्तिशाली सौर तूफान, कई देशों की गुल हो सकती है बिजली

Solar Storm Incident : सूरज से आए भू-चुंबकीय तूफान की वजह से सैटेलाइट और पृथ्वी पर पावर ग्रिड के प्रभावित होने की आशंका है। कई देश अंधेरे में डूब सकते हैं। एनओएए ने इसको जी-5 श्रेणी का बताया है।

नई दिल्ली, रफ्तार। पृथ्वी से 21 साल बाद सबसे शक्तिशाली सौर तूफान टकराया है। इस कारण अमेरिका से ब्रिटेन तक आसमान में चमकीला नजारा दिखा। अमेरिकी राष्ट्रीय समुद्रीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) ने इस तूफान को जी-5 श्रेणी का बताया है। दरअसल, भू-चुंबकीय तूफान को जी-1 से लेकर जी-5 के पैमाने पर मापा जाता है। इसमें G-5 को तूफान का सबसे हाई लेवल माना जाता है। एनओएए ने चेतावनी जारी की है कि सूरज से आए इस भू-चुंबकीय तूफान की वजह से सैटेलाइट और पृथ्वी पर पावर ग्रिड के प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में कम्युनिकेशन बाधित होने के साथ कई देश अंधेरे में डूब सकते हैं।

नासा ने खींची इस विस्फोट की तस्वीरें

नासा की सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी ने सूरज पर हुए इस विस्फोट की तस्वीर खींची हैं। नासा ने बताया कि 10 मई को सूर्य ने तेज आग उत्सर्जित की है। यह घटना स्थानीय समयानुसार सुबह 2.54 बजे अपने चरम पर थी। एनओएए के मौसम पूर्वानुमान केंद्र की मानें तो सूर्य की आग में वृद्धि के कारण कोरोना से प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्रों के कई उत्सर्जन (कोरोनल मास इजेक्शन) हुए हैं।

अक्टूबर 2003 में आया था बड़ा सौर तूफान

इससे पहले अक्टूबर 2003 में बड़ा सौर तूफान आया था। उस वक्त स्वीडन में ब्लैक आउट हो गया था। साउथ अफ्रीका में बिजली के बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी नुकसान पहुंचा था। वैज्ञानिकों ने आगामी दिनों में और अधिक कोरोनल मास इजेक्शन के पृथ्वी पर हमला करने की उम्मीद जताई है।

भू-चुंबकीय तूफान से उत्तरी रोशनी में तेज इजाफा

बता दें, प्रत्येक 11 साल में सूर्य कम और उच्च सौर गतिविधि का अनुभव करता है, जो इसकी सतह पर सनस्पॉट की मात्रा से जुड़ा रहता है। सूर्य के मजबूत एवं लगातार बदलते चुंबकीय क्षेत्र इन अंधेरे इलाकों को संचालित करते हैं। इनमें से कुछ पृथ्वी के बराबर या उससे ज्यादा बड़े हो सकते हैं। भू-चुंबकीय तूफान से उत्तरी रोशनी में तेज इजाफा हुआ है। उसे अमेरिका से लेकर ब्रिटेन तक में देखा गया है।

धरती पर क्या असर?

सूर्य से निकलने वाली तेज आग मजबूत भू-चुंबकीय क्षेत्र बनाती है। यह पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल के हिस्से को बाधित करती है। इससे कम्युनिकेशन और जीपीएस पर तत्काल बुरा असर पड़ने की आशंका है। साथ ही सूर्य से छोड़ी गई असीमित ऊर्जा अंतरिक्ष यान के इलेक्ट्रॉनिक्स को भी बाधित कर सकती है। इसके 20 मिनट से कई घंटे अंतरिक्ष यात्री प्रभावित हो सकते हैं।

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