नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान की दिशा में बड़ा कदम ISRO ने बुधवार को घोषणा करके बढ़ाया जिसमें कहा कि उसने गगनयान की पहली मानवरहित उड़ान के लिए मानव-रेटेड लॉन्च व्हीकल MARK-3 (HLVM3) की असेंबली (संगठन) शुरू कर दी है। यह आयोजन 18 दिसंबर 2014 को हुए LVM3-X/CARE मिशन की 10वीं सालगिरह पर हुआ। इस मिशन को भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान और भविष्य में किए जाने वाले अंतरिक्ष मिशनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मानव मिशन की सुरक्षा पर जोर
ISRO ने बताया कि LVM3 की मानव-रेटिंग पूरी हो चुकी है और सभी प्रणालियों को विश्वसनीय बनाने के लिए कड़ी जांच की गई है। जमीनी परीक्षणों और उड़ान परीक्षणों में इन प्रणालियों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है ताकि मनुष्यों के लिए कोई खतरा न हो। विशेष ध्यान दिया गया है कि अगर उड़ान के दौरान किसी भी आपात स्थिति में चालक दल को बचाना पड़े तो इसके लिए एक सुरक्षित क्रू एस्केप सिस्टम (CES) तैयार किया गया है।
लॉन्च व्हीकल की विशेषताएं
HLVM3 एक तीन-चरणीय रॉकेट है जिसकी पेलोड क्षमता लगभग 10 टन है। यह रॉकेट पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) तक उड़ान भर सकता है। इसका वजन 640 टन है और इसकी ऊंचाई 53 मीटर है। HLVM3 में सुरक्षा के कई अतिरिक्त उपाय किए गए हैं ताकि गगनयान के यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
गगनयान और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) का संबंध
गगनयान कार्यक्रम का अनुभव भारत के अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) के निर्माण और संचालन में भी मदद करेगा। यह ISRO की लंबी अवधि की योजना का हिस्सा है जो भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को दुनिया में और भी आगे बढ़ाने का उद्देश्य रखता है।
मिशन की शुरुआत
ISRO ने 18 दिसंबर 2024 को SDSC में S200 मोटर के साथ नोजल एंड सेगमेंट की स्टैकिंग की जिससे HLVM3-G1/OM-1 मिशन का आधिकारिक लॉन्च अभियान शुरू हो गया। अब अगला कदम लॉन्च व्हीकल के अन्य हिस्सों की असेंबली और परीक्षण की तैयारी है।





