भारतीय छात्रों को लग सकता है बड़ा झटका, स्टूडेंट माइग्रेशन पर सुनक सरकार का ऐक्शन, वीजा पोलिसी के बदलेंगे नियम

New Delhi: ग्रेजुएट वीजा रूट को बंद करने से हर साल करीब 91 हजार भारतीय छात्रों को ग्रेजुएशन रूट से वीजा एंट्री नहीं मिल पाएगी।
British PM Rishi Sunak 
Indian Students at the UK
British PM Rishi Sunak Indian Students at the UK Raftaar.in

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। ब्रिटेन की संसद में आज भारत समेत कई देशों के छात्रों को बड़ा झटका लगने वाला है। प्रधानमंत्री ऋषि सुनक सरकार की कैबिनेट सरकार आज माइग्रेशन एडवाइजरी कमिटी पर बड़ा ऐक्शन लेने वाली है। सुनक सरकार की इस कमिटी ने ग्रेजुएट वीजा रूट में कटौती करने की रिपोर्ट बनाई है। इसका असर सबसे अधिक भारतीय छात्रों पर पड़ेगा।

क्या है ग्रेजुएट वीजा रूट?

ग्रेजुएट रूट वीजा जुलाई 2021 में तत्कालीन गृहमंत्री प्रीति पटेल ने लागू किया था। इस नीति के अनुसार, ब्रिटेन में अंतराष्ट्रीय छात्र ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन करने के दौरान काम करने, रहने और काम की तलाश के लिए आवेदन दे सकत हैं। इस दौरान हर छात्र को ब्रिटेन में अपनी डिग्री हासिल करने के बाद देश में 2 साल तक फ्री वीजा के तहत रहने और काम करने की अनुमति दी जाती है। पीएचडी करने वाले छात्रों के लिए 3 साल तक फ्री वीजा दिया गया है। साल 2021 1,76,000 अंतरराष्ट्रीय छात्रों को ब्रिटेन की इस नीति का लाभ मिला था। जिसमें से 42 फीसदी भारतीय छात्र थे। इस श्रेणी में किसी भी तरह के बदलाव का भारतीय छात्रों पर काफी असर पड़ेगा।

सुनक सरकार का बड़ा ऐक्शन

सुनक सरकार अब इस नीति में बदलाव लाना चाहती है। दरअसल, सरकार अब ब्रिटेन में अंतराष्ट्रीय छात्रों की संख्या को आने से कम करना चाहती है। आज ब्रिटेन की संसद में इस बदलाव पर मुहर लगेगी। मीडिया रिपोर्टस् के अनुसार, ब्रिटेन के गृहमंत्री जेम्स क्लैवरली का कहना है कि इस तरह के वीजा का इस्तेमाल छात्र इमिग्रेशन पाने के लिए करते हैं। दूसरी ओर, सरकार की इस प्लानिंग के बाद से विपक्ष की लेबर पार्टी के अध्यक्ष कीथ स्ट्रेमर का कहना है कि सरकार का यह फैसला चुनावी साल में भारी पड़ने वाला है। इस मामले में पूर्व शिक्षा मंत्री निक्की मोर्गन का कहना है कि हर साल फीस के 2 लाख करोड़ रुपये मिलने बंद हो जाएंगे। इससे देश की इकोनॉमी पर भी बुरा असर पड़ेगा। आपको बता दें, हर साल करीब 1 लाख 30 हजार भारतीय छात्रों को इसके जरिए एंट्री मिलती है। कटौती के बाद केवल 39 हजार छात्रों को ही एंट्री मिल पाएगी।

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