नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करने के दौरान घोषणा की थी कि जल्द ही न्यू इनकम टैक्स बिल लाया जाएगा। अब इस बिल का खाका सामने आ चुका है। 1 अप्रैल 2026 से यह बिल क्रियान्वित हो जाएगा। इसमें सबसे बड़ा बदलाव ये किया गया है कि अगर कोई टैक्सपेयर टैक्स की चोरी करने का आरोपी पाया जाता है तो इनकम टैक्स के जांच आधिकारी उस स्थिति में जांच की कड़ी में आपके फेसबुक अकाउंट और अन्य सोशल मीडिया को खंगाल सकते हैं जिसका इस बिल में प्रावधान किया गया है।
क्या है Virtual Digital Space?
Virtual Digital Space एक ऐसा टर्म है कि जिसके जरिए सोशल मीडिया के अकाउंट को जोड़कर देखा जाता है। इस शब्द को केवल परिचायक के तौर पर देखा जाता है। इनकम टैक्स एक्ट 1961 के हिसाब से अगर टैक्स चोरी के केस में जांच अधिकारी को आरोपी के लैपटॉप या किसी वर्चुअल गैजेट की जानकारी लेनी होती है तो उसके लिए कोर्ट से परमिशन लेनी पड़ती है। हालांकि अब न्यू इनकम टैक्स बिल के लागू होने के बाद यह अधिकार कानूनी रूप से जांच अधिकारियों को मिल जाएगा जिसके जरिए वह आपके सोशल मीडिया अकाउंट्स को भी खंगाल सकते हैं। नीचे दी गई लिस्ट में बताया गया है कि आधिकारी कौन से अकाउंट्स की जांच कर सकते हैं:
- ईमेल सर्वर
- सोशल मीडिया अकाउंट्स
- ट्रेंडिग अकाउंट्स, बैंकिंग अकाउंट्स और अन्य इंवेस्टमेंट अकाउंट्स
- रिमोट सर्वर और क्लाउड सर्वर
- आरोपी के स्वामित्व वाली वेबसाइट
- डिजिटल एप्लीकेशन प्लेटफॉर्म
- उपरोक्त दिए गए समान प्लेटफॉर्म की जांच भी इसमें शामिल है।
लीगल एक्सपर्ट्स ने किया विरोध
न्यू इनकम टैक्स में किए गए इस प्रावधान से लीगल एक्सपर्ट्स खुश नजर नहीं आ रहे हैं। नांगिया एंडरसन एलएलपी के पार्टनर विश्वास पंजियार ने चेतावनी देते हुए कहा कि पर्सनल डेटा की अनावश्यक जांच का कारण बन सकता है, अगर सरकार सख्त सुरक्षा उपाय के बिना अधिकारियों को ये पहुंच देती है। खेतान एंड कंपनी के पार्टनर संजय संघवी ने कहा कि टैक्स अधिकारियों ने पहले भी इसकी मांग की थी लेकिन इसका कानूनी अधिकार नहीं था। न्यू इनकम टैक्स बिल के आने से इसे कानूनी वैधता मिल जाएगी जो खतरनाक साबित हो सकता है।




