नई दिल्ली/रफ्तार न्यूजः उत्तर प्रदेश सरकार धर्म परिवर्तन को लेकर और कठोर कानून बना रही है। योगी सरकार ने सोमवार को इसी से जुड़ा हुआ विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध बिल (Bill) पेश किया है। जिसमें पहले से मौजूद सजा प्रावधानों को और कड़ा किया गया है। प्रमुख बदलावों में अधिकतम सजा को 10 साल से बढ़ाकर आजीवन कारावास करना शामिल है। इसके अलावा, शिकायत दर्ज करने की अनुमति देने के लिए दायरे को बढ़ाना और जमानत को और कठिन बनाना भी प्रस्तावित है। तर्क दिया जा रहा है कि मौजूदा कानून पर्याप्त नहीं हैं, इसलिए इन्हें और कठोर बनाना जरूरी है।
इस विधेयक (Bill) में कहा गया है कि अवैध धर्म परिवर्तन के अपराध की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए, महिलाओं की गरिमा और सामाजिक स्थिति की सुरक्षा के लिए, जुर्माने और सजा को बढ़ाया जाना चाहिए। मौजूदा कानून नाबालिगों, विकलांगों, महिलाओं और अनुसूचित जाति/जनजाति के लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं हैं, इसलिए इसे संशोधित करने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार लव जिहाद के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते रहे हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में योगी सरकार ने इसे एक अहम मुद्दा बनाया था। इसके बाद सरकार ने इस मुद्दे पर सख्त कानून बनाने की कोशिश की और इसके नियमों को और कड़ा किया है। अब पेश किए गए बिल के अनुसार, लव जिहाद के मामलों में पीड़ित के इलाज का खर्च कोर्ट जुर्माने के रूप में तय कर सकेगी।
कोई भी पुलिस को दे सकेगा सूचना
इस बिल को लाने से पहले सरकार ने बताया था कि अपराध की गंभीरता, महिलाओं की समाजिक स्थिति, और दलित-पिछड़े समुदाय से होने के आधार पर सजा तय की जाएगी। नए बिल में अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए भी सजा और जुर्माने को बढ़ाया गया है। पहले लव जिहाद की सूचना या शिकायत देने के लिए पीड़ित व्यक्ति, उसके माता-पिता, भाई-बहन का होना जरूरी था, लेकिन अब कोई भी व्यक्ति लिखित में पुलिस को इसकी सूचना दे सकता है। सूचना मिलने पर जांच होगी और अब ऐसे मामलों की सुनवाई सेशन कोर्ट से नीचे नहीं होगी। साथ ही, लोक अभियोजक को मौका दिए बिना जमानत याचिका पर विचार नहीं किया जाएगा। इस कानून के तहत सभी अपराध गैर-जमानतीय बना दिए गए हैं। पहले 2021 में इसे विधानमंडल से पास कराकर कानूनी रूप दिया गया था, जिसमें अधिकतम 10 साल की सजा और 50 हजार तक का जुर्माना था।
नए बिल में किए गए नए परिवर्तन
- इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्टस के अनुसार, मौजूदा कानून के तहत पीड़ित व्यक्ति, उसके माता-पिता, भाई-बहन या विवाह या गोद लेने से जुड़े किसी भी व्यक्ति को अवैध धर्मांतरण के मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने की अनुमति थी। नए बिल के अनुसार अब “किसी भी व्यक्ति” को शामिल किया गया है। इसमें कहा गया है, “अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन से संबधित कोई भी जानकारी कोई भी व्यक्ति को दे सकता है।”
- बिल में नए प्रावधान के तहत, यदि कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन कराने के इरादे से किसी को डराता है, हमला करता है या बल का प्रयोग करता है, विवाह का वादा करता है, या किसी नाबालिग , महिला, विकलांग व्यक्ति या अनुसूचित जाति/जनजाति के व्यक्ति को उकसाता है, षड्यंत्र रचता है या प्रेरित करता है, तो उसे कम से कम 20 साल की सजा होगी, जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है।
- इस धारा के तहत लगाया गया जुर्माना पीड़ित को चिकित्सा और पुनर्वास के लिए दिया जाएगा। बिल में कहा गया है कि अदालत आरोपी से पीड़ित को 5 लाख रुपये तक का मुआवजा दिला सकती है, जो जुर्माने के अतिरिक्त होगा।
- एक और प्रावधान के अनुसार, जो व्यक्ति अवैध धर्म परिवर्तन के लिए किसी विदेशी या अवैध संस्था से धन प्राप्त करता है, उसे कम से कम 7 साल की सजा होगी। जिसे 14 साल तक बढ़ाया जा सकता है, और न्यूनतम 10 लाख रुपये का जुर्माना होगा।
- बिल के अनुसार, जो कोई भी नाबालिग, विकलांग व्यक्ति, महिला या अनुसूचित जाति/जनजाति के संबंध में कानून का उल्लंघन करता है, उसे 14 साल तक की सजा और कम से कम 1 लाख रुपये का जुर्माना होगा। मौजूदा कानून में 10 साल तक की सजा और न्यूनतम 25,000 रुपये जुर्माना था।
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