नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । अफगानिस्तान के तालिबान सरकार के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी भारत के सात दिन के दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने शुक्रवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। यह दौरा क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
हालांकि, उनके भारत दौरे से ज्यादा चर्चा उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर हो रही है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोगों के निशाने पर आ गई है।
दरअसल, मुत्तकी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को भाग लेने की अनुमति नहीं दी गई। यह खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कई यूजर्स ने इस कदम को ‘अस्वीकार्य’ कहा और इसे पत्रकारिता की मूल भावना के खिलाफ करार दिया।
चिदंबरम ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने भी इस मामले पर नाराजगी जताई। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि उन्हें यह जानकर झटका लगा कि आमिर खान मुत्तकी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को बाहर रखा गया। उनका कहना था कि, पुरुष पत्रकारों को वहां की प्रेस कॉन्फ्रेंस से वॉकआउट कर देना चाहिए था।
सोशल मीडिया पर लोगों ने जताया विरोध
वही, इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर एक नई बहस शुरु हो गई है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने चिदंबरम की बात का समर्थन किया और कहा कि अगर महिला पत्रकारों को प्रेस कॉन्फ्रेंस से बाहर रखा गया, तो पुरुष पत्रकारों को इसका विरोध करना चाहिए था।
मुत्तकी की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस भारत-अफगानिस्तान संबंधों की बजाय महिला पत्रकारों के बहिष्कार को लेकर ज्यादा चर्चा में आ गई। सोशल मीडिया पर इस फैसले की कड़ी निंदा की गई और इसे पत्रकारिता की मूल भावना के खिलाफ बताया गया।





