नई दिल्ली/ रफ्तार डेस्क। पाकिस्तान के मशहूर शायर अहमद मुश्ताक़ का एक शेर है कि ‘इश्क में कौन बता सकता है, किसने किस से सच बोला है। भूल गई वो शक्ल भी आख़िर, कब तक याद कोई रहता है ‘ । पीसीएस अधिकारी ज्योति मौर्या का मामला अभी तक लोगों के जेहन से निकला भी नहीं था कि वैसा ही एक मामला झांसी से भी सामने आ गया। यहां एक युवक ने मजदूरी करके अपनी पत्नी को पढ़ाया और जब पत्नी की सरकारी नौकरी लग गई। तो पत्नी उसे छोड़कर चली गई। अब युवक पत्नी को पाने के लिए पुलिस से लेकर अधिकारियों तक के चक्कर लगा रहा है लेकिन उसके हाथ कुछ नहीं लगा।
दोनों ने लव मैरिज की थी
इस संबंध में युवक ने बताया कि उसने एक लड़की से लव मैरिज किया था। उसकी पत्नी का पढ़ने का मन था इसके लिए उसने मजदूरी की। वहीं पत्नी अब लेखपाल बन गई है। लेखपाल बनने के बाद पत्नी उसे छोड़कर चली गई। जब बुधवार को पत्नी को लेखपाल के पद के लिए नियुक्ति पत्र मिल रहा था तो वो उसे खोजने गया हुआ था लेकिन खाली हाथ लौटना पड़ा। वहीं पत्नी ने पत्रकारों को फोन पर बताया कि उसकी कोई शादी नहीं हुई है।
ओरछा मंदिर में की थी शादी
पीड़ित शख्स का नाम नीरज विश्वकर्मा है। वो झांसी की शहर कोतवाली अंतर्गत बाहर बाबा का आटा में रहता है। नीरज के तीन भाई हैं जिनमें वो सबसे छोटा है। नीरज कारपेंटर का काम करता है। करीब 5 साल पहले झांसी के सत्यम कॉलोनी में रहने वाली रिचा सोनी से उसकी दोस्ती हो गई। दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। जिसके बाद दोनों ने ढाई साल पहले ओरछा मंदिर में जाकर शादी कर ली। जिसके बाद दोनों घर आ गए।
मजदूरी कर अपनी पत्नी को पढ़ाया
इसी दौरान रिचा ने बताया कि वो आगे पढ़ना चाहती है। रिचा को पढ़ाने के लिए नीरज मजदूरी करने लगा। जब रिचा का सरकारी नौकरी लेखपाल में चयन हो गया तो उसका स्वभाव बदल गया। लेखपाल के पद पर चयन होने के बाद रिचा नीरज को छोड़कर चली गई। तब से वो लौटकर घर नहीं आई।
पत्नी को पाने के लिए युवक पुलिस का लगा रहा चक्कर
अपनी पत्नी को पाने के लिए युवक अधिकारियों से लेकर पुलिस तक के चक्कर लगा चुका है, लेकिन पत्नी नहीं मिली। उसे कुछ दिन पहले पता चला कि कलेक्ट्रेट में पत्नी को नियुक्ति पत्र मिल रहा है तो उससे मिलने के लिए वो वहां पहुंच गया, लेकिन पत्नी वहां भी उसे नहीं मिली। नीरज ने बताया कि मैं 18 जनवरी से परेशान हूं। मेरी पत्नी रिचा सोनी लेखपाल बनने के बाद मुझे छोड़कर चली गई है। जिसके चलते मैं दर-दर भटकर रहा हूं।
18 जनवरी को युवक को छोड़कर पत्नी हुई फरार
नीरज ने बताया कि आज से 5-6 साल पहले उनकी रिचा से उस समय मुलाकात हुई थी जब वो छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ाती थी। दोनों की मुलाकात दोस्ती में बदल गई और लगभग 6 महीने के बाद उन्हें प्यार हो गया। जिसके बाद दोनों ने अपनी मर्जी से ओरछा मंदिर में जाकर शादी कर ली। इसके बाद दोनों के बीच कुछ विवाद हो गया। जिसके कारण वो अपने मायके चली गई थी। फैमिली कोर्ट में उसने सेक्शन 9 दायर कर उसे अपने घर बुलाया था। जनवरी महीने में रिचा का लेखपाल पद पर चयन हो गया। लेखपाल के लिए चयन होने के बाद रिचा ने उसे 18 जनवरी को छोड़ दिया। उसके बाद से उसकी रिचा से मुलाकात नहीं हो सकी।
आखिरी बार कोतवाली में हुई थी दोनों की मुलाकात
नीरज ने बताया कि एक बार वो कोतवाली में मिली थी। तब उसने कहा था कि एसडीएम के पास जाओ और शपथ पत्र देकर आओ कि उन दोनों की कोई शादी नहीं हुई है। नीरज ने कहा कि हम यह कैसे कह दें कि हमारी शादी नहीं हुई है। नीरज ने कहा कि हमने बड़ी मुश्किलों से रिचा को पढ़ाया। उसे पढ़ाने के लिए मुझे कई बार कर्ज लेना पड़ा। आज वो कहती है कि हमारी शादी नहीं हुई है।
एक ओर पति नीरज अपनी पत्नी को पाने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है। तो वहीं दूसरी ओर लड़की का कहना है कि उसने नीरज के साथ शादी ही नहीं की है। लड़की ने कहा है कि यह उसे बदनाम करने की साजिश है।
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