नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । तेलंगाना से बड़ी खबर सामने आई है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने अपनी विधान परिषद सदस्य (MLC) के. कविता को पार्टी से सस्पेंड कर दिया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई नियमों के उल्लंघन और पार्टी अनुशासन की खामियों के चलते की गई है।
दिलचस्प बात यह है कि यह निर्णय खुद पार्टी प्रमुख और के. कविता के पिता के. चंद्रशेखर राव (KCR) ने लिया है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते के. कविता को निलंबित किया गया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
नोटिस जारी कर पार्टी ने किया सस्पेंड?
तेलंगाना की राजनीति में सनसनी फैलाते हुए BRS ने बताया कि के. कविता के खिलाफ कार्रवाई पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण की गई है। पार्टी के नोटिस में कहा गया है कि ये गतिविधियां BRS के लिए हानिकारक हैं और पार्टी नेतृत्व इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। पार्टी के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने के. कवीता को तुरंत पार्टी से निलंबित करने का फैसला किया है।
इस कारण सस्पेंड हुईं के कविता
BRS ने बताया कि के. कविता द्वारा हाल के दिनों में की गई टिप्पणियां और पार्टी के मुख्य नेताओं पर लगाए गए आरोपों को पार्टी नेतृत्व ने गंभीरता से लिया है। इन्हीं कारणों के चलते उन्हें सस्पेंड करने का निर्णय लिया गया, ताकि संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखा जा सके।
कल प्रेस कॉन्फ्रेंस में के. कविता ने दावा किया कि कालेश्वरम प्रोजेक्ट में धांधली का दाग उनके पिता और BRS प्रमुख KCR पर लगाने के पीछे उनके भांजे हरीश राव, संतोष कुमार और मेघा कृष्णा राव का हाथ है। कविता ने कहा कि पार्टी की लाइन को तोड़ते हुए हेरा-फेरी कर के KCR का नाम इसमें घसीटा गया।
पार्टी ने इस बयान को गंभीर उल्लंघन मानते हुए के. कविता को सस्पेंड कर दिया है। इस कदम के बाद तेलंगाना में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।
कालेश्वरम परियोजना पर क्या है विवाद? ‘
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की कांग्रेस सरकार ने कालेश्वरम बैराज निर्माण में वित्तीय अनियमितताओं की जांच CBI को सौंपने का ऐलान किया है। इस फैसले को राज्य में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सीएम रेवंत रेड्डी ने कहा कि जस्टिस पीसी घोष आयोग की रिपोर्ट में साफ रुप से बताया गया है कि इस प्रोजेक्ट में कई त्रुटियां और अनियमितताएं थीं। उन्होंने दुख जताया कि कालेश्वरम परियोजना के कारण लगभग एक लाख करोड़ रुपये बर्बाद हो गए।





