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Wednesday, March 4, 2026
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पंडित जवाहर लाल नेहरू को क्यों कहा जाता है चाचा नेहरू, जानिए बाल दिवस मनाने के पीछे की वजह

आज देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म दिवस है। ऐसे में सभी के मन में सवाल आता है कि उन्हें चाचा नेहरू के नाम से भी क्यों जाना पड़ता है।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। उनका जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में हुआ था। जवाहरलाल नेहरू देश की आजादी के बाद भारत के पहले प्रधानमंत्री चुने गए थे। जिसके बाद वह 1964 तक प्रधानमंत्री के पद पर रहे। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को चाचा नेहरू के नाम से भी जाना जाता है।

वर्ष 1912 में जवाहरलाल नेहरू राजनीति से जुड़ गए

जवाहरलाल नेहरू ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा घर में ही निजी शिक्षकों से प्राप्त की थी। मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, जवाहरलाल नेहरू 15 साल की उम्र में इंग्लैंड चले गए थे और हैरो में दो साल रहने के बाद उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में दाखिला ले लिया था। उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से प्राकृतिक विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की। जिसके बाद वर्ष 1912 में जवाहरलाल नेहरू भारत लौट गए थे और राजनीति से जुड़ गए।

1916 में महात्मा गांधी से पहली बार मुलाकात हुई

जवाहरलाल नेहरू ने वर्ष 1912 में एक प्रतिनिधि के रूप में बांकीपुर सम्मेलन में भाग लिया था। जवाहरलाल नेहरू वर्ष 1919 में इलाहाबाद के होम रूल लीग के सचिव चुने गए थे। वर्ष 1916 में जवाहरलाल नेहरू की महात्मा गांधी से पहली बार मुलाकात हुई थी। जिसके बाद जवाहरलाल नेहरू महात्मा गांधी से काफी प्रेरित हुए। जवाहरलाल नेहरू ने वर्ष 1920 में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में पहले किसान मार्च का आयोजन किया था। जवाहरलाल नेहरू को वर्ष 1920-22 के असहयोग आंदोलन में भाग लेने के कारण दो बार जेल भी हो गयी थी।

क्यों पंडित नेहरू को चाचा नेहरू भी कहा जाता है?

पंडित जवाहरलाल नेहरू को बच्चों से खास लगाव था। वो मानते थे कि बच्चे देश का भविष्य है और उनकी अच्छी शिक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा देश की प्राथमिकता होनी चाहिए। बच्चों के लिए उनका प्यार जगजाहिर था, वो जहां जाते वहां बच्चे उन्हें घेर लेते और उन्हें चाचा के नाम से संबोधित करते। वहीं से उन्हें चाचा नेहरू पुकारा जाने लगा। बाल दिवस का मकसद बच्चों के अधिकार, उनकी बेहतरी पर जोर देना है। साल 1954 में संयुक्त राष्ट्र ने 20 नवंबर को बाल दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। भारत में भी शुरुआत में 20 नवंबर को ही बाल दिवस मनाया जाता था। हालांकि, 1964 में उनके निधन के बाद भारत ने बच्चों के प्रति उनके प्रेम के सम्मान में 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया।

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