नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर परिसर में प्रस्तावित कॉरिडोर को लेकर सियासत और धर्म एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने न केवल इस कॉरिडोर पर सख्त आपत्ति जताई बल्कि, मथुरा की सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी को लेकर भी तीखी टिप्पणी की है। शंकराचार्य इस योजना से और सांसद से बेहद नाराज हैं। उन्होने हेमा मालिनी को लेकर भी एक बड़ा बयान दिया है।
उन्होंने इस प्रस्तावित कॉरिडोर को धार्मिक मान्यताएं तोड़ने जैसा बताया है। उन्होंने कहा कि अगर ठाकुर जी के मंदिर में कोई निर्माण करना है, तो सबसे पहले वहां के धर्माचार्य से परमिशन लेनी चाहिए। लेकिन सरकार अपनी योजना लेकर सीधा मंदिर में प्रवेश कर रही है।
सुविधाएं और मंदिर परिसर की व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने के नाम पर सरकार मंदिरों पर कब्जा करना चाहती है। सरकार का ये रवैया सनातनी मर्यादा को तोड़ने जैसा है। इससे पहले भी हमने वाराणसी में देखा कि कॉरिडोर के नाम वहां कैसे धार्मिक मान्यताओं को तोड़ा गया। वहां मंदिर के आसपास राजनेता अपने वाहन खड़े कर रहे है क्या यह सही है।
हेमा मालिनी को बताया मुस्लिम
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मथुरा सांसद हेमा मालिनी द्वारा बांके बिहारी कॉरिडोर का समर्थन करने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। शंकराचार्य ने सांसद को मुसलमान बता दिया है। और कहा कि वो मुस्लिम है उनको सनातन धर्म का ज्ञान नहीं है। उन्होंने कहा कि हेमा मालिनी जी मुसलमान है, विवाह करने के लिए उन्होंने धर्म परिवर्तन किया है। उन्हें इसके बारे में नॉलेज नहीं है।
हेमा मालिनी पर भड़के शंकराचार्य
अभिनेत्री और मथुरा सांसद हेमा मालिनी भी प्रस्तावित बांके बिहारी कॉरिडोर का समर्थन किया है। सांसद के इस समर्थन पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भड़के गए। उनसे वे बेहद नाराज नजर आ रहे है। शंकराचार्य ने सांसद हेमा को लेकर कहा कि उन्होने बचपन से सिनेमा जगत में काम किया है, उनके कहने पर अगर हमारी धार्मिक मान्यताएं तोड़ी जाएंगी तो हम समझेंगे की वृंदावन के लोगों ने गैर-हिंदू प्रतिनिधि को चुनकर के गलती कर दी।
पहले गोरखनाथ मंदिर को ट्रस्ट घोषित करें-शंकराचार्य
शंकराचार्य ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि अगर सरकार के अंदर यह भावना है तो सबसे पहले गोरखनाथ मंदिर के अंदर ट्रस्ट क्यों नही बनाती। अपना मंदिर आप अपने हाथ में रखे हैं और आप हमारे मंदिर में हस्तक्षेप कर रहे हैं। हम दो तरह की बात को स्वीकार नहीं करेंगे। वाराणसी में विश्वनाथ जी के मंदिर में हमने देखा कि किस तरह से मर्यादा तोड़ी गई।
‘आप हमारे मंदिर में हस्तक्षेप न करें’
राजनेता अपने वाहनों को लेकर हमारे मंदिर तक घुस आते हैं, जबकि यह हमारे धर्मस्थल की मर्यादा के खिलाफ है। नेताओं की गाड़ियां भगवान के चौखट तक आ जाए तो यह मर्यादा तोड़ने वाली बात हुई की नहीं। सुविधा व्यवस्थाएं बढ़ाने के लिए हमने तो कभी नए संसद में हस्तक्षेप नहीं किया। वैसे ही हमारे मंदिर के प्रस्ताव के बारे में आप पहले धर्माचार्यो से पूछिए तो। आप हमारे मंदिर में हस्तक्षेप न करें।





