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Saturday, March 7, 2026
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क्यों आजकल खाने में थूक मिलाने की घटनाएं बढ़ती जा रही है, जाने मनोवैज्ञानिक क्या बताते हैं इसका कारण

सोशल मीडिया पर आजकल खाने को दूषित करने की खबरें तेजी से आ रही हैं। इसी बीच कुछ मनोवैज्ञानिक ने यह सब करने के पीछे का कारण और मानसिक स्थिति के बारे में बताया हैं।

नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। यह बात बहुत ही गंभीर है कि आजकल जो खानें को दूषित करने की खबरे आ रहीं हैं इसके पीछे का क्या कारण है? हाईजीन, नीयत और मानसिक विकार से इसे जोड़ा जा सकता है। हमारे समाज में कई लोग, जैसे सब्जी बेचने वाले या सैलून वाले, ऐसी अजीब चीजें करने लगे हैं। हाल ही में गाजियाबाद से एक वीडियो आया है जिसमें मूत्र में आटा गूंथा जा रहा है। इसमें महिला को पुलिस ने पकड़ा था और सोशल मीडिया पर उसकी आलोचना भी हुईं।

हर हाथ में फोन है जिससे ऐसी घटनाएं सामने आ जाती हैं

हमारी संस्कृति कहती है कि इंसान के दिल का रास्ता पेट से होकर गुजरता है। इंसान खाना बड़े विश्वास के साथ खाता है यह सोचकर कि उसे बनाने वाले की नीयत सही होगी। लेकिन अब थूक मिलाकर रोटी, आइसक्रीम, सब्जी और फल बनाने के वीडियो वायरल हो रहे हैं। हर हाथ में कैमरा है जिससे ये बातें सार्वजनिक होती जा रही है। 

मनोवैज्ञानिको का क्या कहना है?  

आपको बता दें कि इसे थूक जिहाद भी कहा जाता रहा है। लेकिन इसे समझने के लिए हमें विज्ञान की ओर देखना होगा। मनोचिकित्सक डॉ. मीर मल्होत्रा कहते हैं कि जो लोग अपने गुस्से को नहीं दिखा पा रहे वे

उसे ऐसे ही बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं। गुस्सा निकालने का ये तरीका लोगों को नुकसान पहुंचाने वाला है जिससे उन्हें लगता है कि उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है।

डॉ. आरके श्रीवास्तव बताते हैं कि जब लोग पैसिव एग्रेशन करते हैं तो वे अपने गुस्से को किसी और तरीके से दिखाते हैं। जैसे अगर कोई बच्चा दूसरे बच्चे की शर्ट काट देता है तो वह अपने गुस्से को इस तरह व्यक्त कर रहा है।

डिसऑर्डर भी हो सकता है इसका कारण 

इसके अलावा, यह इंटरमिटेंट एक्सप्लोजिव डिसऑर्डर का एक हिस्सा भी हो सकता है। इस डिसऑर्डर के तहत व्यक्ति को थूक, मूत्र या अन्य गंदगी मिलाकर अपना गुस्सा कम होता महसूस हो सकता है। ऐसे में वह सोचता है कि उसने किसी तरह अपनी नाराजगी का इजहार किया है, भले ही वह समाज के लिए हानिकारक हो।

मनोवैज्ञानिक इस बात पर जोर देते हैं कि इस तरह के व्यवहार को समझने की जरूरत है। समाज में ऐसी आदतें किस तरह विकसित होती हैं, और लोगों के मन में क्या चलता है, इसे जानना महत्वपूर्ण है। इससे हम बेहतर समझ सकते हैं कि क्यों कुछ लोग इस तरह की गंदगी मिलाने की प्रवृत्ति दिखाते हैं।

अजनबियों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों होता है? 

अगर हम मनोविज्ञानिको के हसाब से देखे तो एक मेड ने पेशाब से गूंथे आटे की रोटी बनाई जिससे यह उनके घरवालों के खिलाफ गुस्से का इजहार था। जो गुस्सा दिखाने का गलत तरीका है। लेकिन जब अनजान लोगों के खाने में थूक मिलाया जाता है तो यह किसके खिलाफ गुस्सा है? डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार ये लोग आत्मविश्वास की कमी से ग्रस्त होते हैं। किसी व्यक्ति से जलन होने पर वे इसे गलत तरीके से दिखाते हैं।

खाने में गंदनी मिलाने वाले के लिए क्या होगी कार्रवाई? 

अब योगी सरकार ने खाने में गंदगी मिलाने के खिलाफ सख्त कानून लाने की योजना बनाई है। सीएम योगी ने कहा कि ऐसे मामलों में जेल और जुर्माना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उत्तराखंड में भी इस पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इस तरह की घटनाएं समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। 

दूसरों की थाली या पेय पदार्थ में थूकने या गंदगी मिलाने की आदत पर अब तक कोई ठोस अध्ययन नहीं हुआ है। मनोवैज्ञानिक इसे बीमारी मानने से इनकार करते हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिक मार्क बरोज के अनुसार, यह केवल एक आदत है, जिसे लोग जानबूझकर करते हैं। 

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