नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। दिल्ली हाईकोर्ट ने जेल में बंद जेएनयू के पूर्व छात्र शरजील इमाम को बड़ी राहत दे दी है। बताना चाहेंगे की शरजील इमाम उत्तर-पूर्वी दिल्ली में साल 2020 में हुए दंगों के मामले में भड़काऊ भाषण देने के दोषी हैं। शरजील इमाम ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की थी, जिसमे उन्होंने दलील दी थी कि उन्होंने अपनी आधी से ज्यादा सजा काट ली है और उन्हें जमानत मिलनी चाहिए। जिसको दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वीकारते हुए शरजील इमाम को वैधानिक जमानत दे दी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने शरजील इमाम को जमानत दी
शरजील इमाम ने उस समय(वर्ष 2019 में) जामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में सीएए के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन में भड़काऊ भाषण दिया था। शरजील इमाम ने दिल्ली हाईकोर्ट से पहले ट्रायल कोर्ट में अपनी जमानत याचिका दायर की थी, जिसमे उन्होंने अपनी यही दलील दी थी कि उन्होंने अपनी आधी से ज्यादा सजा काट ली है और उन्हें जमानत मिलनी चाहिए। लेकिन ट्रायल कोर्ट ने शरजील इमाम को जमानत देने से मना कर दिया था। जिसके बाद शरजील इमाम ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी जमानत याचिका दायर की थी, जिसमे दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस सुरेश कुमार कैत और मनोज जैन की पीठ ने उनकी इस याचिका को स्वीकार कर लिया और शरजील इमाम को वैधानिक जमानत दे दी।
शरजील इमाम को 28 जनवरी, 2020 को गिरफ्तार कर लिया गया था
दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार शरजील इमाम ने ये भड़काऊ भाषण जामिया मिलिया इस्लामिया में 13 दिसंबर, 2019 को और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 16 दिसंबर, 2019 को दिया था। बताना चाहेंगे कि शुरू में शरजील इमाम पर राजद्रोह का मामला दर्ज हुआ था। बाद में उसपर यूएपीए की धारा 13 के तहत कार्रवाई की गई। उसको इस मामले में 28 जनवरी, 2020 को गिरफ्तार कर लिया गया था।
कन्हैया कुमार ने उस समय केंद्र सरकार पर सवाल उठाया था
शरजील इमाम और कन्हैया कुमार दोनों जेएनयू के छात्र रह चुके हैं। कन्हैया कुमार ने उस समय केंद्र सरकार पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि शरजील इमाम के साथ उनका वैचारिक मतभेद रहा है। लेकिन कन्हैया कुमार ने शरजील इमाम पर देशद्रोह के केस को लेकर कहा था कि देशद्रोह का केस सिर्फ कुछ ही लोगों पर क्यों दर्ज होता है।
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