नई दिल्ली/रफ़्तार डेस्क। गुरुवार को दिल्ली विधानसभा में उस फांसीघर को लेकर विवाद हो गया, जिसे स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने सरकारी दस्तावेजों की जांच के आधार पर टिफिन रूम और लिफ्ट बताया था। और आम आदमी पार्टी सरकार पर झूठे ‘फांसीघर’ का उद्घाटन करने का आरोप लगाया गया है। अब इस विवाद को सुलझाने के लिए शुक्रवार को विधानसभा में फैसला सुनाया जाएगा। जानिए क्या है ये विवाद?
दिल्ली विधानसभा भवन के नीचे एक गुप्त फांसीघर
बता दें, दिल्ली विधानसभा भवन के नीचे एक गुप्त फांसीघर है और एक सुरंग भी है जो सीधे लाल किले तक जाती है। इस फांसीघर और सुरंग को लेकर अक्सर विवाद होते रहे हैं, जिसका मामला अब दिल्ली विधानसभा से लेकर संसद तक उठ रहा है। हाल ही में इससे जुड़ा मामला लोकसभा भवन में फिर उठा, जहाँ परिसर में ब्रिटिश काल में बने फांसीघर को लेकर भाजपा और विपक्षी दल आम आदमी पार्टी के बीच तीखी बहस हुई। जिसके बाद हंगामे के बीच नेता प्रतिपक्ष आतिशी और अन्य आप विधायकों को बाहर निकाल दिया गया।
विधानसभा की कार्यवाही समाप्त होने के बाद, मंत्री रवींद्र इंद्राज सिंह के नेतृत्व में भाजपा विधायकों के एक समूह ने कथित फांसीघर का दौरा किया। सवालों के घेरे में आए ‘फांसीघर’ का दौरा करने के बाद, दिल्ली सरकार के मंत्री रवींद्र इंद्राज सिंह ने एक समाचार चैनल से बात करते हुए कहा, पिछली सरकार ने टिफिन रूम को ‘फांसीघर’ बताकर जनता और देश की जनता को धोखा दिया। रवींद्र इंद्राज सिंह ने कहा, अब विधानसभा के आधिकारिक नक्शे के जरिए आम आदमी पार्टी का झूठ सामने आ गया है। रवींद्र इंद्राज सिंह ने लिफ्ट दिखाते हुए कहा कि यह केवल 2 फीट चौड़ा कमरा है, इसलिए इतनी चौड़ाई में फांसी नहीं दी जा सकती। यह सब आम आदमी पार्टी का झूठ था, जो अब सामने आ रहा है।
इस मुद्दे पर जंगपुरा से भाजपा विधायक तरविंदर सिंह मारवाह ने भी आप पर हमला बोलते हुए कहा, आम आदमी झूठ की पार्टी है, आज राष्ट्रीय अभिलेखागार में रखे नक्शे से सच्चाई सामने आ गई है। आम आदमी पार्टी के पास कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं था, न ही वे किसी ऐसी किताब के बारे में बता सके जहाँ उन्होंने सिर्फ़ कंचों से अपने झूठ को सच साबित करने की कोशिश की हो। आपको बता दें, सदन में फांसी घर का बचाव करने की कमान आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा ने संभाली। उन्होंने कहा कि जिस तरह से भाजपा सरकार अंग्रेजों के अत्याचारों के केंद्र फांसी घर पर सवाल उठा रही है, वह गलत है। जिन अंग्रेजों ने जलियांवाला बाग को स्वीकार नहीं किया, वे फांसी घर को कैसे स्वीकार करेंगे। इस सरकार ने फांसी घर पर ब्रिटिश संसद को एक पत्र भी लिखा है, जिन अंग्रेजों ने जलियांवाला बाग को स्वीकार नहीं किया, वे फांसी घर को कैसे स्वीकार करेंगे। ऐसे में हो सकता है कि आज से 10-15 साल बाद जब यह साबित हो जाए कि यह एक ‘फांसीघर’ था, तो देश का सिर शर्म से झुक जाए। इस दौरान दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सदन में वर्ष 1911 का दिल्ली विधानसभा का एक नक्शा भी रखा और बताया कि आप सरकार में जिस जगह का ‘हंसी घर’ के रूप में उद्घाटन किया गया था, वह असल में एक टिफिन रूम था और पास में ही एक लिफ्ट थी।
अब संजीव झा के अनुसार, वर्ष 1911 में यह एक टिफिन रूम था, लेकिन वर्ष 1928 के बाद यह ‘हंसी घर’ बन गया, इसका प्रमाण वहाँ पाया जाने वाला संगमरमर है, क्योंकि अंग्रेज स्वतंत्रता सेनानी को फांसी देने के बाद संगमरमर से वार करते थे, ताकि यह पता चल सके कि सेनानी की फांसी के बाद मृत्यु हुई है या नहीं।
आपको बता दें, दिल्ली विधानसभा के नीचे एक गुप्त फांसीघर और एक सुरंग है। जो सीधे लाल किले तक जाती है, इस फांसीघर और सुरंग को लेकर अक्सर विवाद होते रहे हैं। इसका मुद्दा दिल्ली विधानसभा से लेकर संसद तक उठ चुका है, जिसे हाल ही में लोकसभा में फिर से उठाया गया है जिसमें अब मांग की जा रही है कि दिल्ली विधानसभा के अंतर्गत बने इस फांसीघर को संग्रहालय में तब्दील कर दिया जाए। क्योंकि, ऐसा भी कहा जाता है कि यह जगह भूतिया है; लोगों ने यहां से तरह-तरह की आवाजें सुनी हैं और अलौकिक चीजों को महसूस किया है।




