नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। भगवान जगन्नाथ मंदिर के दुर्लभ खजाने को 14 जुलाई 2024 को खोल दिया गया। भगवान जगन्नाथ मंदिर के इस दुर्लभ खजाने को इससे पहले वर्ष 2018 में खोलने की कोशिश की गई थी। लेकिन कुछ कारणों से इस खजाने को खोलने की कोशिश को बंद करना पड़ा था। आखिरी समय इस खजाने को वर्ष 1985 में खोला गया था। उस समय खजाने में राजाओं के मुकुट और खजानों से भरी तिजोरियां मिली थी। इन खजानों में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के बेहद कीमती आभूषण और खाने पीने के बर्तन शामिल है।
यह मंदिर 12वी सदी में बना था
भगवान जगन्नाथ मंदिर के दुर्लभ खजाने में वह चीजे शामिल हैं, जिनको उस समय के राजाओं और भक्तों ने चढ़ावे में दान किया था। यह मंदिर 12वी सदी में बना था, तब से यह चीजे इस मंदिर में खजाने के रूप में रखी हुई हैं। इस मंदिर में दो भंडार है एक बाहरी और एक भीतरी भंडार। खजाने के बाहरी हिस्से को समय समय पर खोला जाता रहा है। बाहरी हिस्से को त्योहार या किसी विशेष अवसर पर खोलकरगहने निकालकर भगवान जगन्नाथ को सजाया जाता है।
इस कार्य को रथ यात्रा के समय तो किया ही जाता है। जानकारी के अनुसार भगवान जगन्नाथ मंदिर के दुर्लभ खजाने के भीतरी भंडार के चैंबर को आखिरी बार वर्ष 1978 में खोला गया था। वर्ष 1985 में भी इन्हें खोला गया था, लेकिन इसका क्या कारण और वजह थी और अंदर क्या क्या है, इस बारे में कभी भी कोई जानकारी नहीं दी गई।
एक भरी 11.66 ग्राम के बराबर होती है
वहीं वर्ष 2018 में पूर्व कानून मंत्री प्रताप जेना ने विधानसभा में भगवान जगन्नाथ मंदिर के एक सवाल के जवाब में कहा था कि जब मंदिर को वर्ष 1978 में आखिरी समय खोला गया था तो उस समय रत्न भंडार में साढ़े 12 हजार भरी के करीब सोने के गहने थे। बता दें कि एक भरी 11.66 ग्राम के बराबर होती है। इन सोने के गहनों में कीमती पत्थर भी जड़े हुए थे। वहीं उस समय 22 हजार भरी से भी अधिक के चांदी के बर्तन थे। इसके अलावा भी और बहुत से गहने मिले थे, जिनका उस समय वजन नहीं किया गया था।
लेकिन इस रिपोर्ट में क्या है, इसको सार्वजनिक नहीं किया गया
हाईकोर्ट के आदेश के बाद वर्ष 2018 में भगवान जगन्नाथ मंदिर के दुर्लभ खजाने के भीतरी चैंबर को खोलने के आदेश दिए थे। इसके बाद इस खजाने के भीतरी चैंबर को खोलने की प्रक्रिया को शुरू तो किया गया, लेकिन पूरा नहीं किया जा सका था। इसका कारण चैंबर की चाबी नहीं मिल पाना बताया गया था। वहीं नियम के अनुसार ये चाबी पुरी के कलेक्टर के पास होती है। लेकिन तत्कालीन कलेक्टर अरविंद अग्रवाल ने उस समय यह माना था कि उन्हें इस चाबी की कोई भी जानकारी नहीं है। इसके बाद पूरे राज्य में इसको लेकर काफी नाराजगी सामने आयी थी। इसके बाद तत्कालीन सीएम नवीन पटनायक ने इस मामले को संभालते हुए, इसके जांच के आदेश दिए थे। जांच कमेटी ने अपनी जांच के 2 हफ्तों बाद जानकारी दी कि उन्हें एक लिफाफा मिला है, जिसमे लिखा हुआ है भीतरी रत्न भंडार की डुप्लीकेट चाबियां इसमें है। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में एक काफी बड़ी रिपोर्ट भी सौंपी थी। लेकिन इस रिपोर्ट में क्या है, इसको सार्वजनिक नहीं किया गया।
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